दिल की घातक बीमारियों में हार्ट अटैक और कार्डिएक अरेस्ट मुख्य रूप से शामिल है। हार्ट अटैक के दौरान तो बचने की संभावनाएं अधिक होती हैं लेकिन कार्डिएक अरेस्ट के दौरान मौके बेहद कम होते हैं। ऐसे में इमरजेंसी के दौरान कार्डिएक अरेस्ट के शिकार मरीज को समय रहते सीपीआर देकर बचाया जा सकता है। 

आखिर क्या है सीपीआर? कार्डियोपल्मोनरी रेसेसेटेशन एक तरह की छाती की मसाज प्रक्रिया है। इसके तहत मरीज को आर्टिफिशल तरीके से ऑक्सिजन दिया जाता है ताकि ब्रेन को ऑक्सिजन मिलता रहे। 

सीपीआर की जरूरत कबः हार्ट अटैक और कार्डिएक अरेस्ट दोनों अलग-अलग समस्याएं हैं। हालांकि हार्ट अटैक के ठीक बाद या रिकवरी के बाद कार्डिएक अरेस्ट हो सकता है। वैसे तो कार्डिएक अरेस्ट होने से पहले कोई लक्षण दिखाई नहीं देते, यह एक मेडिकल इमरजेंसी है, फिर भी आपके सामने किसी को यह समस्या हो जाए, तो उसे तुरंत सीपीआर देकर बचाने की संभावनाएं बढ़ा सकते हैं। 

लाइफस्टाइल की वजह से बढ़ रहे हृदय रोग के मरीजः हृदय की बीमारी के लिए आहार-विहार और आचार-विचार का संतुलन बहुत जरूरी है, जो आजकल कम ही हो पता है। 90 प्रतिशत तक हृदय की समस्याओं के लिए खान-पान और जीवनशैली जिम्मेदार है। ऐसे में बचाव के मद्देनजर समय-समय पर नियमित जांच बहुत जरूरी है। एक उम्र में महिलाओं में पीरियड्स बंद होने के बाद उनमें हृदय की बीमारी होने की संभावाना काफी बढ़ जाती है। 

ऐसे दें सीपीआरः मरीज को एकदम समतल और कठोर जगह पर लिटा दें, ध्यान रहे में उसकी नाक को बंद करके तेजी से उसके मुंह में फूंक मारें। इस प्रक्रिया में आपका तेज-तेज से छाती को दबाना जरूरी है। सीने को इतनी तेजी से दबाना है कि हर बार सीना करीब डेढ़ इंच नीचे जाए।