नई दिल्ली : एरिस (Eris) या ईजी 5.1 नाम का एक नया कोविड वैरिएंट इस वक्त ब्रिटेन में चिंता का नया कारण बन रहा है। यह पूरे ब्रिटेन में तेजी से फैल रहा है। शुरुआत में 31 जुलाई को इसे एक वैरिएंट के रूप में पहचाना गया। एरिस ओमिक्रॉन स्ट्रेन का एक वेरिएंट है। अब यह दूसरा सबसे फैलने वाला वैरिएंट बन गया है, जो हर 10 में से एक कोविड मामले के लिए जिम्मेदार है। इस नए कोविड वैरिएंट से कोरोना संक्रमण में बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है, जब देश अस्पताल में भर्ती होने वालों की संख्या बढऩे से जूझ रहा है। खराब मौसम और लोगों की कमजोर होती इम्यूनिटी ने इसे और बढ़ा दिया है। ऐसे हालात ने हेल्थ एक्सपर्ट को खतरे की घंटी बजाने के लिए प्रेरित किया है। उन्होंने ओमिक्रॉन, आर्कटुरस और एरिस के सबवैरिएंट से कोविड की एक और बड़ी लहर आने की आशंका की चेतावनी दी है।
एरिस के संक्रमण के अंतर्राष्ट्रीय मामलों, विशेष रूप से एशियाई इलाकों में भी तेजी से बढ़ रहे हैं। इसके बाद यूके स्वास्थ्य सुरक्षा एजेंसी एरिस के पनपने के तरीके की बारीकी से निगरानी कर रही है। 10 जुलाई से शुरू होने वाले हफ्ते में ब्रिटेन के लगभग 11.8 फीसदी कोविड मामलों की पहचान एरिस संक्रमण के रूप में की गई थी। ताजा डेटा से पता चलता है कि यह आंकड़ा सभी मामलों के चिंताजनक 14.6 फीसदी तक पहुंच गया है। इसके कारण विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने निगरानी के लिए वैरिएंट की अपनी सूची में ईजी 5.1 जोड़ लिया है। एरिस को इसके कुछ लक्षण मूल ओमिक्रॉन स्ट्रेन से विरासत में मिले हैं। जैसा कि हेल्थ स्टडी से सामने आया है, वैरिएंट से जुड़े बड़े पांच लक्षण हैं। जिनमें नाक बहना, सिर दर्द, थकान (हल्की या गंभीर), छींक आना और गला खराब होना शामिल हैं।
हेल्थ एक्सपट्र्स ने इस बात पर चिंता जताई कि संभवत: इन वेरिएंट्स, कमजोर प्रतिरक्षा और खराब मौसम के कारण ब्रिटेन में कोरोना की एक और घातक लहर आ सकती है। उन्होंने बताया कि हाल ही में लगातार बारिश के मौसम से कोविड मामले बढ़ सकते हैं, क्योंकि लोग घर के अंदर अधिक समय बिताते हैं। हेल्थ एक्सपट्र्स ने चेतावनी दी कि यह सिर्फ शुरुआत हो सकती है। जैसे ही गर्मियों की छुट्टियां खत्म होंगी और स्कूल और ऑफिस फिर से खुलेंगे, सितंबर में कोरोना की लहर तेजी से बढ़ सकती है। हालांकि इंपीरियल कॉलेज लंदन में प्राथमिक देखभाल और सार्वजनिक स्वास्थ्य के प्रमुख प्रोफेसर अजीम मजीद ने एरिस से जुड़ी चिंताओं को कम करके कुछ आशंकाओं को शांत करने का प्रयास किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मामलों की संख्या में उतार-चढ़ाव स्वाभाविक है। बहरहाल एरिस को डब्ल्यूएचओ ने निगरानी के तहत एक वैरिएंट के रूप में नामित किया है। मगर इसे मौजूदा वक्त में चिंता के एक वैरिएंट के रूप में नहीं दर्ज किया गया है।