गुवाहाटी : असम सरकार के कृषि विभाग द्वारा तिनसुकिया जिला प्रशासन और पतंजलि फूड्स लिमिटेड के सहयोग से तिनसुकिया जिले के सदिया महकमा अंतर्गत लाउपानी गांव में मंगलवार को राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन के तहत ऑयल पाम की खेती के एक व्यापक कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। मुख्यमंत्री और पतंजलि फूड्स के संस्थापक रामदेव ने सैखोवा में डॉ. भूपेन हजारिका पुल के समीप लाउपानी गांव में ऑयल पाम का पौधे रोपण करके कार्यक्रम का उद्घाटन किया। इस मौके पर आयोजित समारोह में सीएम डॉ. हिमंत विश्व शर्मा ने कहा कि असम मलेशिया और इंडोनेशिया से पाम तेल आयात करने के नाम पर सालाना करोड़ों रुपए खर्च कर रहा है। इसलिए सरकार ने असम में ऑयल पाम की खेती करने और उनसे निकाले गए तेल को राज्य में बेचने का फैसला किया है। उन्होंने  लोगों से बिना किसी हिचकिचाहट के ऑयल पाम की खेती से लाभ उठाने का आग्रह किया।

कृषि विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव आशीष भूटानी ने पाम ऑयल परियोजना के बारे में विस्तार से बताया। इसके बाद पतंजलि उद्योग के संस्थापक रामदेव ने अपना भाषण  दिया।  वे मुख्यमंत्री डॉ. शर्मा की तारीफ में पंचमुंह नजर आए। योग गुरु ने कहा कि भारत विदेशों से 1,00,000 करोड़ रुपए का पाम तेल आयात करता है और केंद्र सरकार  इसकी भरपाई के लिए ऑयल पाम की खेती की योजना बनाई है। रामदेव ने यह भी कहा कि पतंजलि उद्योग गुवाहाटी में एक विश्व स्तरीय अस्पताल और असम में दो मेडिकल कॉलेज स्थापित करेगी। योग गुरु ने यह भी कहा कि असम में 10,000 प्रतिभाशाली छात्रों को शिक्षा प्रदान करने की भी उनकी योजना है।

कृषि मंत्री अतुल बोरा ने अपने भाषण में कहा कि कुछ लोग ऑयल पाम की खेती का विरोध कर रहे हैं, लेकिन ऑयल पाम की खेती में धान की खेती की तुलना में कम पानी की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य परती भूमि पर ऑयल पाम की खेती करके किसानों की अर्थव्यवस्था में सुधार करना और किसानों को वाणिज्यिक कृषि के लिए आकर्षित करना है। उन्होंने कहा कि सरकार ने असम में 3,75,000 हेक्टेयर भूमि पर खेती करने का फैसला किया है। उन्होंने किसानों से दूसरों की परवाह किए बिना ऑयल पाम की खेती करने का आग्रह किया।