गुवाहाटी : अमस के मुख्यमंत्री डॉ.हिमंत विश्वशर्मा ने लोकसभा में कांग्रेस के उपनेता गौरव गोगोई की ओर से सरकार के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी की तत्कालीन सरकारों ने पिछले 75 सालों में अपनी गलत नीतियों की वजह से पूर्वोत्तर में अलगाववाद और जातीय संघर्ष पैदा कर वार जोन बना दिया है। जनता भवन में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान मुख्यमंत्री डॉ.शर्मा ने कांग्रेस पर तीखी प्रक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी को अपने गिरेबां में झांकना चाहिए कि उनकी पूर्ववर्ती सरकारों की गलत नीतियों की वजह से किस तरह से मणिपुर सहित पूर्वोत्तर राज्यों में नरसंहार हुआ है। मुख्यमंत्री हिमंत ने तथ्यों का हवाला देते हुए कहा कि मणिपुर में जातीय हिंसा पहली बार नहीं हुई है, बल्कि 1990 में मणिपुर में हुए हिंसा के दौरान 300 लोगों मारे गए, 1993 में सबसे अधिक 1100 लोगों मारे गए थे, 1997 में 400 के अलावा लगातार कांग्रेस की विभाजनकारी नीतियों से मणिपुर सहित पूरे पूर्वोत्तर राज्यों में भड़की हिंसा से व्यापक पैमाने पर नरसंहार हुआ है।
मुख्यमंत्री डॉ. शर्मा ने कांग्रेस को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा कि 1962 में चीन के साथ युद्ध खत्म होने से पहले ही देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने पूर्वोत्तर के लोगों को बाय-बाय कर दिया और बाद में वे यहां झांकने तक नहीं आए। असम के कोकराझाड़ में हुए जातीय हिंसा में बड़ी संख्या में जानमाल का नुकसान हुआ था, लेकिन तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह यहां नहीं आए। मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर सभी नरसंहार की घटनाओं का दोषी करार दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की गलत नीतियों के कारण असम के नेली में बड़ी संख्या में लोग मारे गए थे, लेकिन पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने घुसपैठियों का विरोध करने वालों पर आरोप लगाकर अपना पल्ला झाड़ लिया था। मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर कांग्रेस की पहले की सरकारों का इतिहास देखा जाए तो उनका रक्तरंजित इतिहास है, जिसे कांग्रेस नहीं बदल सकती। आज पूर्वोत्तर में जातीय हिंसा की जड़ कांग्रेस की सिर्फ गलत नीतियों के कारण हो रहा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में स्वार्थ की राजनीति के कारण असम, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम सहित अन्य पूर्वोत्तर क्षेत्रों में अलगवा पैदा हुआ।
उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा कि पूर्वोत्तर में घुसपैठ को कांग्रेस द्वार समर्थन करने, अंतरारष्ट्रीय सीमा को खुले छोड़ने और राज्यों के बीच सीमा निर्धारण नहीं करने के कारण जातीय हिंसा में लगातार बढ़ोत्तरी हुई है। उन्होंने कहा कि 2014 में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद इस क्षेत्र का विकास तेजी से होने के साथ ही पूर्वोत्तर के मुख्यधारा में लाने का काम किया गया। उन्होंने कहा कि मणिपुर की स्थिति आज पैदा नहीं हुई है बल्कि यह चिंगारी वर्षों पहले की है। भाजपा नीत सरकार आने के बाद पूर्वोत्तर के विकास और इस क्षेत्र में अलगाववाद को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए गए । मुख्यमंत्री हिंमंत ने कहा कि पिछले नौ वर्षो में पूर्वोत्तर में चरमपंथी, उग्रवादी गुटों से संबंधित हजारों लोगों ने आत्मसमर्पण किया, इस क्षेत्र में आपराधिक घटनाओं पर नियंत्रण पाए जा रहे हैं, अलगाववाद की घटनाओं में काफी की कमी आई। कांग्रेस की तत्कालीन सरकारों के समर्थन में असम में घुसपैठियों को समर्थन किया गया, जिसके कारण आज असम के सामने कई तरह की चुनौतियां खड़ी हो रही है।