नई दिल्लीः लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान पीएम मोदी ने असम और मिजोरम की दो घटनाओं का जिक्र किया। इसके साथ ही उन्होंने लोहिया द्वारा पूर्व पीएम नेहरू को लिखी एक चिट्ठी का भी उल्लेख किया। मणिपुर हिंसा को लेकर विपक्ष द्वारा केंद्र सरकार के खिलाफ संसद में लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर पीएम मोदी ने जवाब दिया। इस दौरान उन्होंने विपक्ष के तमाम दलों पर करारा हमला बोला। इसके साथ ही पीएम ने अपने संबोधन में पूर्वोत्तर में कांग्रेस की पूर्ववर्ती सरकारों के शासनकाल में हुई घटनाओं का जिक्र किया। इसके साथ ही उन्होंने जाने-माने समाजवादी लोहिया के एक चिट्ठी का भी जिक्र किया। आइए जानते हैं ये घटना कहां हुईं और वे घटनाक्रम क्या थे? पीएम ने अपने संबोधन में कहा कि पांच मार्च 1966 को कांग्रेस ने वायु सेना के माध्यम से मिजोरम की असहाय जनता पर हमला किया...। मिजोरम आज भी उस भयानक दिन का शोक मनाता है। उन्होंने कभी लोगों को सांत्वना देने की कोशिश नहीं की...कांग्रेस ने इस घटना को देश के लोगों से छुपाया। तब इंदिरा गांधी देश की प्रधानमंत्री थीं...।
दरअसल, एक मार्च 1966 को मिजोरम आजादी के लिए संघर्ष कर रहा था और उसने आइजोल में अपना स्वतंत्र झंडा फहराया। दावा किया जाता है कि तीन मार्च से मिजो नेशनल फ्रंट (एमएनएफ) ने असम राइफल्स के सभी ठिकानों पर गोलीबारी शुरू कर दी दूसरी ओर सरकार ने भी लड़ाई जारी रखी। आरोप पांच मार्च, 1966 को सुबह 11 बजे के आसपास जेट फाइटर्स को आइजोल पर हमला करने के लिए भेजा गया। इस घटना के गवाहों में शामिल मिडिल स्कूल थिंगडॉल के पूर्व हेडमास्टर नगुरचुआना भी इसी तरह के तमाम दावे करते हैं। हालांकि, प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के नेतृत्व में भारतीय वायु सेना की आइजोल पर बमबारी को भारतीय वायु सेना द्वारा कभी भी मान्यता नहीं दी गई। पीएम ने अपने भाषण में कहा कि ये लोग आज ऐसी बातें कर रहे हैं, लेकिन पिछले कर्मों का क्या? नेहरू जी ने अपने समय में असमवासियों को मरने के लिए छोड़ दिया। ये लोग आज हमसे सवाल पूछ रहे हैं? दरअसल, पीएम मोदी भारत-चीन युद्ध के दौरान असम के एक गांव में हुई अफरातफरी को संदर्भित कर रहे थे। चीन द्वारा बोमडिला के पतन के बाद ऑल इंडिया रेडियो पर नेहरू के एक भाषण के बाद असम के तेजपुर में कई लोगों को लगा कि उन्हें ब्रह्मपुत्र घाटी की कोई चिंता नहीं है। हालांकि, कुछ दिग्गज कांग्रेसियों का मानना है कि असम के लोगों ने नेहरू को गलत समझा।
20 नवंबर, 1962 को आकाशवाणी पर राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में नेहरू ने कहा था, विशाल चीनी सेनाएं नेफा के उत्तरी भाग में मार्च कर रही हैं। बालीग से ला में हमें पराजय का सामना करना पड़ा और आज नेफा का एक छोटा सा शहर बोमडिला भी हार गया। जब तक आक्रमणकारी भारत से बाहर नहीं चला जाता या खदेड़ नहीं दिया जाता तब तक हम चैन से नहीं बैठेंगे। 71 वर्षीय तेजपुर निवासी प्रणब सिन्हा कहते हैं कि नेहरू का भाषण प्रसारित होने के बाद तेजपुर में लोग उन्मादी हो गये। ये भागने लगे। हर जगह अराजकता थी। तेजपुर के बेकारगांव के निवासी 77 वर्षीय अतुल सैकिया दावा करते हैं, असम को लगभग चीन को सौंप दिया गया था जब जवाहरलाल नेहरू ने बोमडिला पर कब्जे के बाद अपने भाषण में घोषणा की थी कि मेरा दिल असम के लोगों के साथ है। असम कांग्रेस नेता बेदब्रत बरुवा कहते हैं, जब नेहरू बोमडिला पर कब्जे के बारे में बोल रहे थे तो लगभग रो रहे थे। मुझे याद है कि नेहरू ने लगभग रुंधे स्वर में कहा था, मेरा दिल असम के लोगों के लिए दुखता है। लेकिन मुझे पूरा विश्वास था कि चीनी असम में प्रवेश नहीं करेंगे। पीएम ने अपने भाषण में कहा कि लोहियावादी चले गए। जो लोग अपने आप को लोहियाजी का वारिस कहते हैं, जो कल सदन में उछल-उछलकर हाथ लंबे-चौड़े कर बोलने की कोशिश कर रहे थे। लोहियाजी ने नेहरूजी पर गंभीर आरोप लगाए थे।