गुवाहाटी : भारतीय निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने शुक्रवार को 52 दिन पहले जारी असम विधानसभा और लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्निर्धारण के मसौदे पर अपनी अंतिम मुहर लगा दी। 20 जून को आयोग की ओर से निर्वाचन क्षेत्र के पुनर्निर्धारण के मसौदे को सार्वजनिक करने के बाद राज्य में विभिन्न दलों और संगठनों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया था। गौरतलब है कि जहां विपक्ष ने सरकार के खिलाफ खुलकर विरोध प्रदर्शन जारी रखा वहीं सत्तारूढ़ भाजपा और उसके सहयोगी एजीपी के कुछ विधायक और सांसद भी मसौदे के खिलाफ सड़कों पर उतर आए। इसी बीच देश के चुनाव आयोग ने शुक्रवार को इस मसौदे को अंतिम रूप दे दिया। अंतिम सूची के प्रकाशन से पहले 19, 20 और 21 जुलाई को तीन दिनों के लिए गुवाहाटी में जन सुनवाई आयोजित की गई थी। जन सुनवाई में मुख्य चुनाव आयुक्त और दो अन्य आयुक्त उपस्थित थे। जनसुनवाई में 20 राजनीतिक दलों ने भाग लिया था।
आयोग को सुनवाई के लिए 1222 याचिकाएँ प्राप्त हुई थीं। आयोग का दावा है कि अंतिम सूची तैयार करने के दौरान 1,222 आवेदनों और सिफारिशों में से 45 प्रतिशत को स्वीकार कर लिया गया है। 2001 की जनगणना के आधार पर तैयार निर्वाचन क्षेत्र पुनर्निर्धारण की अंतिम सूची में 9 विधानसभा क्षेत्रों और 1 लोकसभा क्षेत्र को अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित किया गया है। 19 विधानसभा क्षेत्र और 2 लोकसभा क्षेत्र अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित होंगे। अंतिम सूची में अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित विधानसभा क्षेत्रों की संख्या 8 से बढ़ाकर 9 कर दी गई है। इसी प्रकार, अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित विधानसभा क्षेत्रों की संख्या 16 से बढ़कर 19 हो गई। पश्चिम कार्बी आंग्लांग जिले में एक विधानसभा क्षेत्र बढ़ गया है। बोडोलैंड में विधानसभा क्षेत्रों की संख्या अब 11 से बढ़कर 15 हो जाएगी। कोकराझाड़ और डिफू लोकसभा क्षेत्र अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित होंगे। लखीमपुर लोकसभा क्षेत्र अनारक्षित रहेगा।
धेमाजी जिले में एक विधानसभा क्षेत्र अनारक्षित होगा। डिफू लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित होगा और इसमें छह विधानसभा क्षेत्र और तीन स्वायत्त जिले होंगे। बराक घाटी के तीन जिलों क्रमशः कछार, करीमगंज और हैलाकांडी को कवर करने वाले दो संसदीय क्षेत्र होंगे। मानाह के नाम से एक विधान सभा और काजीरंगा नाम से एक नया लोकसभा क्षेत्र होगा। लोगों की मांग पर कई विधानसभा क्षेत्रों के नाम संयुक्त रूप से होंगे। चुनाव आयोग द्वारा जारी निर्वाचन क्षेत्र के पुनर्निर्धारण की अंतिम सूची में मसौदे से थोड़ा बदलाव किया गया है। विभिन्न पक्षों की मांग के बावजूद आयोग ने अंतिम सूची में अधिक बदलाव नहीं किया।