गुवाहाटी : राज्य के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में शिक्षकों को ड्यूटी के दौरान टी-शर्ट, जींस या रंगीन पोशाक पहनने की अनुमति नहीं होगी। इसी तरह  शिक्षिकाओं को भी जींस और टी-शर्ट पहनकर शिक्षण संस्थानों में आने की अनुमति नहीं होगी। उच्च शिक्षा विभाग ने आखिरकार सरकारी और प्रादेशिकीकृृत कॉलेजों और विश्वविद्यालयों समेत उच्च शिक्षा संस्थानों में कार्यरत शिक्षकों के लिए ड्रेस कोड तय कर दिया है। उच्च शिक्षा विभाग के सचिव नारायण कोंवर द्वारा हस्ताक्षरित एक अधिसूचना में उच्च शिक्षा संस्थानों में काम करने वाले पुरुष शिक्षकों के लिए शर्ट-पैंट तथा धोती और पायजामा पहनने को मंजूरी दी गई है।

नोटिस में सख्ती से कहा गया है कि पुरुष शिक्षक काम के समय टी-शर्ट या जींस पहनकर कॉलेज या यूनिवर्सिटी में नहीं आ सकते, वहीं दूसरी ओर कॉलेज और विश्वविद्यालय की शिक्षिका सुरुचिपूर्ण चूड़ीदार (सलवार सूट), चादर-मेखला, साड़ी या कोई अन्य पारंपरिक पोशाक पहनकर अपना कर्तव्य निभा सकती हैं। शिक्षिकाओं को जींस, लेगिंग, टी-शर्ट पहनने की अनुमति नहीं है। पुरुष और महिला दोनों शिक्षकों को साफ सुथरे  तथा शालीन रंग के कपड़े पहनने होंगे। शिक्षकों को चमकीले रंग के कैज़ुअल या पार्टी ड्रेस पहनकर काम पर आने की अनुमति नहीं होगी।

सरकारी नोटिस का उल्लंघन करने वाले शिक्षकों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। गौरतलब है कि इसी महीने  बजाली के पटाचारकुचि स्थित निर्मल हालोइ कॉलेज में कुछ नवनियुक्त शिक्षिकाओं के चुड़ीदार पहनने को लेकर कॉलेज में अप्रिय स्थिति पैदा हो गई थी। कॉलेज के छात्र संघ ने महिला शिक्षकों के चूड़ीदार पहनने का विरोध किया था और यहां तक कि तालाबंदी जैसी कार्रवाई भी की गई थी। इस घटना से राज्यव्यापी प्रतिक्रिया हुई थी। घटना के दौरान कॉलेज के प्रिंसिपल भी विवाद के घेरे में आ गए थे। आखिरकार, राज्य के उच्च शिक्षा विभाग ने ड्रेस कोड पर एक आधिकारिक नोटिस जारी कर स्थिति स्पष्ट कर दी है। उच्च शिक्षा संस्थानों में महिला शिक्षक सुरुचिपूर्ण चूड़ीदार पहन सकती हैं।