बेंगलुरु:  चंद्रयान-3 मिशन के बाद भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की प्रक्षेपण सूची बेहद लंबी है। आने वाले दिनों में इसरो द्वारा किए जाने वाले प्रक्षेपणों में सूर्य का अध्ययन करने के लिए एक मिशन, जलवायु अवलोकन उपग्रह का प्रक्षेपण, गगनयान मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम के तहत एक प्रायोगिक यान और भारत-अमरीका सिंथेटिक एपर्चर रडार का प्रक्षेपण शामिल है। इसरो के एक अधिकारी ने मंगलवार को बताया कि इसके अलावा एक्सपोसैट (एक्स-रे पोलारीमीटर उपग्रह) भी प्रक्षेपण के लिए तैयार है, जो चरम स्थितियों में चमकदार खगोलीय एक्स-रे स्रोतों की विभिन्न गतिशीलता का अध्ययन करने वाला देश का पहला समर्पित पोलारीमेट्री मिशन है।

सूर्य का अध्ययन करने वाली पहली अंतरिक्ष-आधारित भारतीय वेधशाला, आदित्य-एल1, प्रक्षेपण के लिए तैयार हो रही है, इसका प्रक्षेपण संभवत: सितंबर के पहले सप्ताह में किया 'क्रैश लैंडिंग' की आशंका होगी। यदि 23 अगस्त को (लैंडर मॉड्यूल का) कोई भी तकनीकी मानक असामान्य पाया जाता है, तो हम लैंडिंग को 27 अगस्त तक के लिए स्थगित कर देंगे। इसरो ने चंद्रयान-3 के लैंडर के चंद्रमा की सतह पर उतरने के तय समय से एक दिन पहले मंगलवार को कहा कि चंद्रयान-3 मिशन निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ रहा है।

इसरो ने कहा कि मिशन तय कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ रहा है। प्रणालियों की नियमित जांच की जा रही है। सुचारू संचालन जारी है। चंद्रयान-3 लैंडर मॉड्यूल की चंद्रमा की सतह पर 'सॉफ्ट लैंडिंग' भारत को उन देशों के विशिष्ट समूह में शामिल कर देगी, जिन्होंने चंद्रमा की सतह तक पहुंचने की उपलब्धि हासिल की है - अमरीका, तत्कालीन सोवियत संघ और चीन।