नई दिल्ली : चंद्रमा पर उतरने वाला लैंडर जब उसकी सतह पर उतरेगा तो उसकी स्पीड करीब दो मीटर प्रति सेकेंड होगी। वैज्ञानिकों ने जो प्रोग्रामिंग और मॉनिटरिंग की है उसके मुताबिक चंद्रमा की सतह को छूने के लिए इससे ज्यादा की स्पीड बेहद चुनौतीपूर्ण हो सकती थी। यही नहीं जब लैंडर चंद्रमा की सतह पर उतर जाएगा तो उसमें से निकलने वाला रोवर भी कुछ सेंटीमीटर की गति के हिसाब से ही चलना शुरू करेगा। वैज्ञानिकों का कहना है कि महज 14 दिनों तक चंद्रमा की सतह पर सक्रिय रूप से काम करने वाला रोवर महज पांच सौ मीटर ही चलकर चंद्रमा के राज खोल देगा। वैज्ञानिकों ने बताया कि चंद्रयान के लैंडिंग से तेरह मिनट पहले का वक्त सबसे चैलेंजिंग होगा। जैसे-जैसे मिशन चंद्रयान के पूरे होने की घडिय़ां नजदीक आती जा रही हैं समूचे देश ही नहीं, बल्कि दुनिया की निगाहें इसरो की ओर से मिलने वाली पल-पल की अपडेट पर बनी हुई है।
वरिष्ठ वैज्ञानिक प्रोफेसर संजीव सहजपाल कहते हैं कि जब चंद्रमा की सतह पर लैंडर उतर रहा होगा तो उसकी स्पीड एक तरह से शून्य ही होगी। उनका कहना है कि वैसे तो चंद्रयान में यह स्पीड दो मीटर प्रति सेकेंड की होती है, लेकिन चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण के कारण इसकी प्रोग्रामिंग और प्रणाली ऐसी होती है कि यह सतह पर पहुंचते ही शून्य हो जाए। प्रोफेसर सहजपाल का कहना है कि जैसे-जैसे लैंडर चंद्रमा की सतह के नजदीक आता जाएगा उसकी गति सबसे महत्वपूर्ण होती जाएगी। क्योंकि चंद्रमा के जिस हिस्से पर लैंडर उतरने वाला है वहां की सतह सामान्य जैसी नहीं है। इसलिए अनुमानित गति उतरते करते वक्त 2 मीटर प्रति सेकेंड की होगी। वैज्ञानिकों का कहना है कि चंद्रमा की सतह पर लांच होने वाले लैंडर के आखिरी 13 मिनट सबसे महत्वपूर्ण होंगे। क्योंकि यही वक्त होगा जब लैंडर चंद्रमा की सतह के सबसे करीब पहुंचने वाला होगा और उसके अपने गुरुत्वाकर्षण के चलते उसकी गति को भी प्रभावित कर सकता है।
हालांकि वैज्ञानिकों का कहना है कि चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण को ध्यान में रखकर ही लैंडिंग की पूरी योजना बनाई गई है। एक अनुमान के मुताबिक चंद्रमा की सतह से 30 किलोमीटर की ऊंचाई से लैंडिंग शुरू करने पर लैंडर की स्पीड तेज होगी। क्योंकि इसी तेज स्पीड के साथ चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण भी उसको अपनी ओर खींचेगा। वरिष्ठ वैज्ञानिक प्रोफेसर संजीव सहजपाल कहते हैं कि इसी प्रक्रिया के दौरान चंद्रयान के सिस्टम से लैंडर के उतरने की विपरीत दिशा में रेट्रो फायर शुरू होगी। इस प्रक्रिया से चंद्रयान की गति चंद्रमा की सतह पर उतरते वक्त न सिर्फ कंट्रोल में रहेगी, बल्कि अनुमानत: दो मीटर प्रति सेकेंड होगी। और सतह को छूते वक्त करीब करीब शून्य रह जाएगी। वैज्ञानिकों का कहना है कि लैंडर से निकलने वाला रोवर जब चंद्रमा की सतह पर उतरेगा तो वह अपनी सबसे धीमी गति से उसको छुएगा।
वैज्ञानिकों के मुताबिक रोवर की स्पीड चंद्रमा की सतह पर 1 सेंटीमीटर प्रति सेकेंड की रहने वाली है। क्योंकि चंद्रमा पर धरती की तुलना में 14 दिनों का एक दिन होता है, इसलिए यह रोवर चंद्रमा के लिए एक दिन और धरती के लिए 14 दिन की प्रोग्रामिंग और मॉनिटरिंग के साथ उतारा जा रहा है। वरिष्ठ वैज्ञानिक प्रोफेसर सहजपाल कहते हैं इसकी जो गति है उसके लिहाज से यह अपने पूरे 14 दिनों तक सिर्फ पांच मीटर की दूरी ही तय कर सकेगा। हालांकि जो प्रोग्रामिंग तय की गई है उसके मुताबिक 14 दिन बाद दोबारा दिन होने पर रोवर के एक बार फिर से चलने का अनुमान लगाया जा रहा है। लेकिन वैज्ञानिकों के मुताबिक पहले 14 दिनों के भीतर मिलने वाली जानकारी ही बेहद महत्वपूर्ण होगी।