गुवाहाटी : स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर धेमाजी कॉलेज के परेड ग्राउंड में 15 अगस्त, 2004 को हुए भयानक बम विस्फोट के काले अध्याय की कानूनी प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है। गौरतलब है कि इस बम विस्फोट में दस छोटे बच्चों और तीन महिलाओं सहित तेरह निर्दोष लोगों की मौत हुई थी। घटना के 15 साल बाद 2019 में धेमाजी जिला सत्र न्यायाधीश की अदालत ने इस मामले पर फैसला सुनाया था, लेकिन आरोपियों के रिश्तेदारों ने फैसले के खिलाफ गौहाटी उच्च न्यायालय में अपील की थी। गुवाहाटी हाई कोर्ट ने बृहस्पतिवार को उक्त जघन्य बम विस्फोट के मामले में सभी आरोपियों को बरी कर दिया। इसके साथ ही उस काले अध्याय की कानूनी प्रक्रिया लगभग खत्म हो गई है। उल्लेखनीय है कि धेमाजी जिला सत्र न्यायाधीश की अदालत ने  प्रतिबंधित संगठन अल्फा के सहयोग से भयानक बम विस्फोट करने वाले 14 आरोपियों में से 7 को बरी कर दिया था, एक को भगोड़ा घोषित किया था, 4 को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई और 2 को चार वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी।

अदालत ने जहां मुही संदिकै , जतिन दुवरी, लीला गोगोई और दीपांजलि गोहाईं को आजीवन कारावास की सजा सुनाई, वहीं हेमेन गोगोई और प्रशांत भुइयां को चार साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी। लंबी सुनवाई के बाद आरोपियों के परिजनों ने धेमाजी जिला सत्र न्यायाधीश द्वारा दिए गए फैसले के खिलाफ 2019 में गुवाहाटी उच्च न्यायालय में अपील की थी। गुवाहाटी हाई कोर्ट ने 24 जुलाई को मामले की सुनवाई की लेकिन उसका फैसला स्थगित कर दिया था। गुवाहाटी हाइकोर्ट ने सुनवाई के पूरे एक महीने के बाद बृहस्पतिवार को 15 अगस्त 2004 के धेमाजी बम विस्फोट मामले में अंतिम फैसला सुनाया। गौहाटी उच्च न्यायालय ने निचली अदालत में दोषी ठहराए गए सात आरोपियों में से छह को बरी कर दिया।

आरोपियों में से एक अल्फा नेता रशिद भराली अभी भी फरार है। गौरतलब है कि 15 अगस्त 2004 को स्वतंत्रता दिवस के ध्वजारोहण समारोह से पहले एक बम विस्फोट में सिद्धार्थ टाइड, प्रदीप्त गोगोई, मनजीत गोगोई, गिरिन सैकिया, बिजित सोनोवाल, अरुणा सैकिया, रूपा सैकिया, दिनेश पादुन, मानसी बरगोहाईं और युगांत पादुन नामक 10 बच्चों की मौत हो गई थी। उक्त घटना में नमिता गोगोई, धनदा गोगोई (देउरी) और चित्रावती दलै नामक तीन मृत महिलाओं की भी मौत हो गई थी। इसके अलावा विस्फोट में रीमा पैंगिंग, लुनिमाधव डेल और कई अन्य लोग भी गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उनके शरीर पर अभी भी चोट के निशान मौजूद हैं।

हाईकोर्ट के फैसले पर जहां आरोपियों के परिवार ने संतोष व्यक्त किया वहीं मृतकों तथा विस्फोट में घायल लोगों के परिवार और रिश्तेदारों ने गहरा असंतोष व्यक्त किया। गौहाटी उच्च न्यायालय के फैसले के बाद अखिल धेमाजी जिला छात्र संघ ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की। अखबार को भेजे गए एक बयान में धेमाजी जिला छात्र संघ के अध्यक्ष संजीव दास और महासचिव जयंत बरगोहाई ने कहा कि  गुवाहाटी उच्च न्यायालय के फैसले के बारे में हमें कुछ नहीं कहना है, लेकिन जांच अधिकारी की अंतिम विफलता और निष्कि्रयता के कारण पीड़ितों को न्याय नहीं मिला। असम सरकार के गृह विभाग और पुलिस विभाग की लापरवाही के कारण ही आज अपराधी मुक्त होने में सफल हो गए।