एथेंसः भारत और यूनान ने शुक्रवार को अपने संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ा दिया तथा 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का संकल्प जताया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनके यूनानी समकक्ष किरियाकोस मित्सोताकिस के बीच व्यापक बातचीत के दौरान प्रवासन और गतिशीलता साझेदारी समझौते को मजबूत करने पर सहमति जताई। बीते 40 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली यूनान यात्रा पर जोहानिसबर्ग से यहां पहुंचे मोदी ने कहा कि दोनों पक्षों ने रक्षा और सुरक्षा, अवसंरचना, कृृषि, शिक्षा, और नई व उभरती प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में संबंधों विस्तार देने का फैसला किया। रक्षा और सुरक्षा के क्षेत्रों में अपनी बढ़ती एकरूपता को दर्शाते हुए दोनों पक्ष रक्षा औद्योगिक सहयोग को मजबूत करने का संकल्प व्यक्त करने के अलावा राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों के स्तर पर एक संस्थागत संवाद ढांचा बनाने पर भी सहमत हुए। उन्होंने यूनानी समकक्ष के साथ अपनी बातचीत के बाद मीडिया बयान में कहा कि भारत और यूनान दोनों यूक्रेन संकट को हल करने के लिए कूटनीति और बातचीत का समर्थन करते हैं। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों के बीच हिंद-प्रशांत सहित भू-राजनीतिक, अंतर्राष्ट्रीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर उत्कृष्ट समन्वय है। उन्होंने कहा कि 40 साल के अंतराल के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह पहली यूनान यात्रा है।
फिर भी न तो हमारे संबंधों की गहराई कम हुई है, न ही हमारे संबंधों की गर्माहट में कोई कमी आई है। उन्होंने कहा कि इसलिए, आज प्रधानमंत्री और मैंने भारत-यूनान साझेदारी को ‘रणनीतिक’ स्तर पर ले जाने का फैसला किया है। मोदी ने कहा कि हमने तय किया है कि हम रक्षा और सुरक्षा, बुनियादी ढांचे, कृषि, शिक्षा, नई और उभरती प्रौद्योगिकी और कौशल विकास के क्षेत्रों में अपना सहयोग बढ़ाकर अपनी रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करेंगे। अपनी ओर से, मित्सोताकिस ने मोदी का स्वागत करते हुए कहा कि आज, ग्रह पर सबसे अधिक आबादी वाला, सबसे बड़ा लोकतंत्र पृथ्वी के सबसे पहले लोकतंत्र के पास आ रहा है। उन्होंने कहा कि यूनान भारत के साथ अपने संबंधों का रणनीतिक साझेदारी के तौर पर उन्नयन करके बहुत खुश है। उन्होंने कहा, दोनों पक्ष विभिन्न चुनौतियों से निपटने के लिए कंधे से कंधा मिलाकर चलने के लिए तैयार हैं, खासकर यूक्रेन में अंतर्राष्ट्रीय उथल-पुथल और युद्ध के दौर में -ऐसी घटनाएं जो संयुक्त राष्ट्र चार्टर का पालन करना और भी जरूरी बना देती हैं। मित्सोताकिस ने कहा कि दोनों पक्ष समुद्री सुरक्षा बनाए रखने के लक्ष्य और समुद्र के कानून पर संधि के पालन की आवश्यकता पर पूरी तरह से एकजुट हैं क्योंकि पूर्वी भूमध्यसागरीय और हिंस-प्रशांत क्षेत्र में स्थिति पर चिंताओं को देखते हुए यह महत्वपूर्ण है।
यूनानी प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और यूनान के बीच सीधी हवाई संपर्कता पर भी चर्चा हुई क्योंकि उन्होंने पर्यटन में व्यापक अवसरों पर प्रकाश डाला। अपनी टिप्पणी में, मोदी ने कहा कि दोनों पक्षों ने आतंकवाद विरोधी और साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में आपसी सहयोग पर भी चर्चा की। वार्ता के बाद कृषि सहयोग पर एक समझौता भी किया गया। दूसरी ओर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को शुक्रवार को यूनान की राष्ट्रपति कैटरीना एन सकेलारोपोउलू द्वारा प्रतिष्ठित ‘ग्रैंड क्रॉस ऑफ द ऑर्डर ऑफ ऑनर’ से सम्मानित किया गया। इसके साथ ही मोदी यह सम्मान पाने वाले पहले विदेशी शासनाध्यक्ष बन गए। यह सम्मान यूनान की राष्ट्रपति द्वारा ऐसे प्रधानमंत्रियों और प्रतिष्ठित व्यक्तियों को दिया जाता है, जिन्होंने अपने विशिष्ट पद के कारण यूनान के कद को बढ़ाने में योगदान दिया है। विदेश मंत्रालय ने एक विज्ञप्ति में कहा कि प्रधानमंत्री मोदी को राष्ट्रपति सकेलारोपोउलू द्वारा ग्रैंड क्रॉस ऑफ द ऑर्डर ऑफ ऑनर से सम्मानित किया गया। इसमें कहा गया कि यह सम्मान पाने वाले वह पहले विदेशी शासनाध्यक्ष हैं। पुरस्कार समारोह एथेंस में राष्ट्रपति भवन में हुआ। विज्ञप्ति में कहा गया कि मोदी ने भारत के लोगों की ओर से इस विशेष सम्मान के लिए सकेलारोपोउलू और यूनान की सरकार तथा लोगों को धन्यवाद दिया।
मोदी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कार्यक्रम की एक तस्वीर साझा करते हुए कहा कि यह यूनान के लोगों का भारत के प्रति सम्मान दर्शाता है। विदेश मंत्रालय ने एक ट्वीट में कहा कि यह भारत-यूनान साझेदारी की ताकत को प्रतिबिंबित करने वाला एक विशेष सम्मान है। प्रधानमंत्री कार्यालय के मुताबिक, प्रशस्ति में कहा गया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सेवा में, यह सम्मान भारत के मैत्रीपूर्ण जनों को दिया गया। इसमें कहा गया कि इस यात्रा के अवसर पर यूनान सरकार भारत के प्रधानमंत्री का सम्मान करती है, जिन्होंने अपने देश को आगे बढ़ाने और उसे वैश्विक स्तर पर स्थापित करने में अथक प्रयास किए तथा जो भारत की आर्थिक प्रगति और समृद्धि के लिए व्यवस्थित रूप से कार्यरत हैं, जो बड़े सुधारों को आकार दे रहे हैं। वे ऐसे राजनेता हैं, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय गतिविधियों में पर्यावरण सुरक्षा व जलवायु परिवर्तन के विषय को उच्च प्राथमिकता दिलवाई है। ‘ग्रैंड क्रॉस ऑफ द ऑर्डर ऑफ ऑनर’ की स्थापना 1975 में की गई थी।
सितारे के आमुख पर देवी अथेना का चित्र अंकित है। इसके साथ ‘ओनली द राइचस शुड बी ऑनर्ड’ (केवल सत्यनिष्ठ व्यक्तियों का सम्मान हो) इबारत उकेरी हुई है। प्रधानमंत्री मोदी ने यूनान में अपने कार्यक्रमों की शुरुआत एथेंस में अज्ञात सैनिकों के मकबरे पर श्रद्धांजलि अर्पित करने के साथ की। पिछले 40 साल में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यूनान की यह पहली यात्रा है। किसी शीर्ष भारतीय राजनेता की यूनान की आखिरी यात्रा सितंबर 1983 में हुई थी जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देश की यात्रा की थी। इसके बाद उन्हें एक समारोह में ‘सलामी गारद’ पेश किया गया। मोदी, यूनान के प्रधानमंत्री किरियाकोस मित्सोताकिस के निमंत्रण पर यहां आए हैं।