गुवाहाटी : मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा की कैबिनेट के फैसले के अनुसार स्वास्थ्य विभाग ने एनआरआई कोटा में 30 छात्रों को पहले वर्ष के लिए 18 लाख रुपए लेकर नामांकन की सुविधा दी थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने एनआरआई कोटा नामांकन पर रोक लगा दी है। गौरतलब है कि सिर्फ राजस्व इकट्ठा करने के  उद्देश्य से सैकड़ों मेधावी अभ्यर्थियों को सीटों से वंचित करके इस साल से एनआरआई कोटा शुरू कर दिया गया था। राज्य सरकार ने वर्तमान 2023 वर्ष में मेडिकल पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए एनआरआई के लिए 7 प्रतिशत कोटा निर्धारित किया है। हालांकि एनआरआई कोटे में कुल 88 सीटें आरक्षित थीं लेकिन आरक्षित सीटों के लिए केवल 34 उम्मीदवारों ने आवेदन किया था। चिकित्सा शिक्षा निदेशालय ने काउंसिलिंग के बाद 30 विद्यार्थियों को एनआरआई कोटे में प्रवेश दिया था। विडंबना यह है कि एनआरआई कोटा में  167 अंक और 168 अंक पाने वाले उम्मीदवारों को भी डॉक्टर बनने के लिए पैसे के बदले सीटें बेच दी गईं।

स्वाभाविक रूप से एनआरआई कोटे की सीटों पर प्रतिभा की बर्बादी पर प्रतिक्रिया हुई। हालांकि, एनआरआई कोटे में सर्वाधिक 538 अंक वाले अभ्यर्थियों को भी नामांकन का मौका दिया गया था। गौरतलब है कि एनआरआई कोटा ने पहले शैक्षणिक वर्ष में सीटों के लिए प्रत्येक उम्मीदवार से 25,000 अमेरिकी डॉलर (लगभग 20 लाख रुपए) एकत्र किए हैं। सरकार ने अगले साढ़े तीन सालों के लिए उम्मीदवारों से सालाना 22,250 डॉलर वसूलने का गजट नोटिस भी जारी किया है। हालांकि, ईडब्ल्यूएस कोटे में 10 प्रतिशत आरक्षित सीटों में कटौती कर एनआरआई कोटे में सीटें बेच देने को लेकर कछार के दो वंचित उम्मीदवारों हदीउज जमान लस्कर और मिराज मेहदी हुसैन ने 10 अगस्त में सुप्रीम कोर्ट में एक रिट याचिका दायर की। दोनों अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि ईडब्ल्यूएस के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण होना चाहिए लेकिन असम सरकार ने कौशल से ईडब्ल्यूएस के लिए 10 प्रतिशत सीटें दिखाई हैं लेकिन वास्तव में केवल 7 प्रतिशत सीटें आरक्षित की हैं।

राज्य में 12 मेडिकल कॉलेज हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने केवल 6 मेडिकल कॉलेजों के लिए ईडब्ल्यूएस सीटें आरक्षित की हैं। इसके अलावा, एनआरआई कोटे को प्राथमिकता देते हुए राज्य कोटे से छह मेडिकल कॉलेजों के लिए 10 प्रतिशत ईडब्ल्यूएस सीटें आरक्षित की गई हैं। वंचित उम्मीदवारों ने यह भी आरोप लगाया कि राज्य कोटे से सीटों के आरक्षण से ईडब्ल्यूएस में सीटों की संख्या स्वाभाविक रूप से कम हो गई है। इसी याचिका के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने डब्ल्यू पी(सी)862/23 नंबर में एक मुकदमा दर्ज किया। सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति रवीन्द्र भट्ट और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार की खंडपीठ ने शुक्रवार को असम सरकार के एनआरआई कोटे में नामांकन पर स्थगन आदेश जारी किया। अदालत ने यह भी कहा कि मामले की अगली सुनवाई तक एनआरआई को कोटा में नामांकन नहीं किया जा सकता है। पीठ ने असम सरकार को ईडब्ल्यूएस सीट आरक्षण में कटौती पर अपनी स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया।