नगांव/कोकराझाड़/नलबाड़ी : असम में तीन नए मेडिकल कॉलेजों के शैक्षणिक सत्र शुक्रवार को शुरू होने पर मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्वशर्मा ने कहा कि इन नए संस्थानों से सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ेगी, जिससे समग्र स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि नए कॉलेजों को चरणबद्ध तरीके से नर्सिंग, डेंटल और अन्य पाठ्यक्रमों की शुरुआत के साथ चिकित्सा शिक्षा के केंद्र में बदल दिया जाएगा। असम जल्द ही चिकित्सा शिक्षा के लिए देश का केंद्र यानी हब बन जाएगा। हम 2,000 एमबीबीएस सीटें और 1,000 से अधिक पीजी सीटें हासिल करने की राह पर हैं। तीन नवनिर्मित मेडिकल कॉलेजों ने एक साथ अपने शैक्षणिक सत्र शुरू कर दिए हैं।
उल्लेखनीय है कि इस अवसर पर आज नगांव महखुली स्थित नवनिर्मित चिकित्सा महाविद्यालय में राज्य के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्वशर्मा ने उपस्थित होकर अपने भाषण के दौरान कहा कि आज का दिन नगांव जिले के लिए एक बड़ी प्राप्ति का दिन है। कारण कि असम चिकित्सा महाविद्यालय का इतिहास नगांव जिले के नाम से जुड़ गया। पहला चिकित्सा महाविद्यालय होने से आज का दिन नगांव के लिए एक ऐतिहासिक यात्रा है। वर्ष 1970 के बाद वर्ष 2010 तक असम में कोई भी चिकित्सा महाविद्यालय का स्थापना नहीं हुआ था। इसके पहले असम में तीन चिकित्सा महाविद्यालय का स्थापना हुआ था। डिब्रूगढ़ चिकित्सा महाविद्यालय,गुवाहाटी चिकित्सा महाविद्यालय और सिलचर चिकित्सा महाविद्यालय। वर्ष 2010 में हमने जोरहाट में पहले चिकित्सा महाविद्यालय की स्थापना की थी।
वर्ष 2010 से वर्ष 2020 के अंदर असम में पांच नए चिकित्सा महाविद्यालयों की स्थापना की गई। वर्ष 2020 से 2030 के अंदर असम के लोग और चार नए चिकित्सा महाविद्यालय को प्राप्त करेंगे। आज असम में 12 चिकित्सा महाविद्यालय लोगों की सेवा प्रदान करने में सक्षम हैं। यह ऐतिहासिक यात्रा यहीं तक सीमित नहीं होगी और 9 चिकित्सा महाविद्यालयोां के निर्माण का कार्य विभिन्न स्तर पर शुरू किया जाएगा। स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में असम एक अलग पहचान बनाने में सक्षम हुआ है। शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में असम आगामी समय में भारत में पहला या दूसरा राज्य होने में सक्षम होगा। अपने भाषण के प्रसंग में मुख्यमंत्री डॉ हिमंत विश्वशर्मा ने कहा कि वर्ष 2014 में असम में एमबीबीएस की कुल सीट 726 थीं पर इस वर्ष 1500 सीटें चिकित्सा महाविद्यालयों में विद्यार्थियों को पढऩे के लिए उपलब्ध करा दी गई है।
\हम पोस्ट ग्रेजुएट की सीट 395 की जगह 772 करने में सक्षम हुए हैं। वर्ष 2014 में हमारे देश में चिकित्सा महाविद्यालय 387 रहा,वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने 9 वर्ष कार्यकाल के दौरान चिकित्सा महाविद्यालय की संख्या 596 कर दी। अर्थात स्वाधीनता के बाद जितने भी प्रधानमंत्री हुए सभी ने 387 चिकित्सा महाविद्यालयों की स्थापना की गई है। भारत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में अकेले ही 300 चिकित्सा महाविद्यालय स्थापना करके एक आमूल परिवर्तन स्वास्थ्य शिक्षा के क्षेत्र में ला दिए हैं। 2014 में देश के अंदर चिकित्सा महाविद्यालय में एमबीबीएस की सीटें 51हजार थीं पर इस वर्ष 90 हजार तक बढ़ा दी गई हैं। इन चिकित्सा महाविद्यालयों से 5 वर्ष के अंदर 100 चिकित्सा हम पाने में सक्षम होंगे, जो देश के सेवा के लिए व्रती होंगे।
दूसरी ओर हमारे कोकराझाड़ संवाददाता के अनुसार आज राज्य में एक साथ तीन मेडिकल कॉलेज में पाठ्यक्रम शुरू होने के साथ साथ कोकराझाड़ मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भी स्वास्थ्य मंत्री केशव महंत ने पाठ्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए महंत ने कहा कि ऐतिहासिक दिन है क्योंकि राज्य में आज पहली बार एक साथ तीन तीन मेडिकल कॉलेज में पाठ्यक्रम का शुभारंभ किया गया है। यह मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्वशर्मा के कठोर परिश्रम की वजह से ही संभव हो पाया है।