गुवाहाटी : असम लोकसेवा आयोग (एपीएससी) घोटाले पर गठित पूर्व न्यायाधीश विप्लव कुमार शर्मा आयोग ने 2014 में घटी एपीएससी घोटाले पर अपनी रिपोर्ट सौंपने की तैयारी कर रहा है। दिसपुर  सूत्रों ने बताया कि विप्लव कुमार शर्मा आयोग की अवधि बीते 31 अगस्त को समाप्त हो गई, लेकिन  रिपोर्ट के अंतिम चरण को पूरा करने के लिए अतिरिक्त समय की मांग कर रहा है। सूत्र ने बताया कि इस बार विप्लव कुमार शर्मा आयोग की रिपोर्ट में करीब 32 राजपत्रित अधिकारियों के भ्रष्टाचार का पर्दाफाश किया जाएगा। आयोग को 12 अधिकारियों में धोखाधड़ी के सबूत मिले हैं और अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 20 अन्य संदिग्ध उम्मीदवारों की तलाश की जा  रही है। उल्लेखनीय है कि जांच कर रही डिब्रूगढ़ पुलिस ने 2014 एपीएससी परीक्षा में चयनित 21 अधिकारियों को गिरफ्तार किया था। न्यायिक आयोग पहले ही भाजपा के पूर्व विधायक के चचेरे भाई भार्गव मुनि दास को समन जारी कर चुका है।

2014 एपीएस परीक्षा में 44वें स्थान पर चयनित हुए भार्गव मुनि दास को हाल ही में गृह मंत्रालय ने डीएसपी से एएसपी पद पर पदोन्नत किया है। दूसरी ओर एपीएससी के सह परीक्षा नियंत्रक तथा कुख्यात राकेश पाल के प्रमुख सहयोगी पवित्र कैवत्य के बयान के आधार पर तथा सबूतों के तहत आरोपियों में एपीएस भनिता नाथ, उत्पाद शुल्क अधीक्षक मानवी दास, वेदांत भूषण सैकिया, समरज्योति भुइयां, दिव्यज्योति कार्जी, गणपति राय और असीम डेका का नाम शामिल हैं। आयोग ने इन सभी राजपत्रित अधिकारियों को नोटिस जारी कर दिया था। आयोग ने लगभग 20 अन्य संदिग्ध उम्मीदवारों के नाम भी बताए हैं। इन अधिकारियों पर घर पर लिखकर उत्तर पुस्तिकाएं जमा करने का संदेह है। आयोग को संदेह है कि इन अधिकारियों की उत्तर पुस्तिकाओं के पहले पन्ने को छोड़कर अंदर के पन्ने परीक्षा के बाद संलग्न किए गए थे। उत्तर पुस्तिकाएं आधी खुली हैं और अक्षर पिन किए हुए हैं।

यदि अभ्यर्थियों ने मूल उत्तर पुस्तिकाओं में उत्तर लिखे हैं तो उन्होंने संदेह व्यक्त किया कि अक्षरों को क्यों और कैसे पिन किया गया है। परीक्षा कक्ष में बैठे-बैठे उत्तर पुस्तिकाओं की सुंदर एवं साफ-सुथरी लिखावट से अभ्यर्थिॄो के उत्तर लिखने पर संदेह व्यक्त किया गया है।  इसके अलावा ज्यादातर संदिग्ध अभ्यर्थियों ने उत्तर पुस्तिकाओं में ‘सीरीज नंबर’ लिखने में गलती की है। इसका मतलब यह है कि अभ्यर्थियों ने अपने उत्तर ‘बी’ सीरीज के प्रश्नपत्रलिखे थे, लेकिन उनमें से अधिकांश ने अज्ञात कारणों से उत्तर पुस्तिकाओं पर ‘ए’ सीरीज लिखी थी। राकेश पाल पर अपने गृह कार्यालय सत्संग विहार और अपने भाई राजीव पाल के प्रिंटिंग हाउस में सवाल-जवाब लिखने का आरोप लगाया गया है। इसलिए यह संदेह है कि इन अभ्यर्थियों को प्रश्नपत्र पहले ही प्राप्त हो गए थे या उन्होंने घर बैठे ही कोरे कागज पर अपने उत्तर लिख दिए और फिर मूल उत्तर पुस्तिका के साथ पन्ने जोड़ दिए। इस बात की पूरी संभावना है कि पुलिस पूछताछ में ये अभ्यर्थी फर्जी साबित होंगे।