गुवाहाटी : असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्वशर्मा ने सोमवार को कहा कि राज्य में इस साल बिजली की मांग में भारी वृद्धि हुई है जिस कारण राज्य ने अपने स्रोतों से बिजली उत्पादन क्षमता का करीब करीब पूरा इस्तेमाल कर लिया है। शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार ने बिजली की मांग को पूरा करने के लिए नियमित दरों पर अधिक बिजली खरीद की व्यवस्था की है, जबकि विभिन्न बिजली उत्पादन कंपनियों के साथ समझौता करके दीर्घकालिक व्यवस्था की जा रही है। राज्य विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन बिजली परिदृश्य पर कार्य स्थगन प्रस्ताव का जवाब देते हुए शर्मा ने कहा कि राज्य में इस साल व्यस्त समय के दौरान बिजली की मांग में अचानक वृद्धि देखी गई है।
उन्होंने कहा कि जहां 2018-19 में व्यस्त समय के दौरान मांग लगभग 1,600 मेगावाट थी, वहीं पिछले दो वर्षों में यह 1,800 मेगावाट हो गई, लेकिन 2022-23 में यह 1,970 मेगावाट तक पहुंच गई। शर्मा ने कहा कि सरकार बिजली की मांग में हुई अचानक वृद्धि के कारणों का विश्लेषण कर रही है और इसमें व्यावसायिक गतिविधियों में वृद्धि के साथ-साथ लोगों की समृद्धि ने योगदान दिया है। शर्मा ने कहा कि 31 अगस्त के बाद तीन-चार दिनों तक कुछ बिजली कटौती हुई थी, जब बिजली की मांग अचानक बढ़ गई थी। लेकिन अब बिजली की कटौती नहीं हो रही है। उन्होंने यह भी दावा किया कि असम में बिजली की स्थिति अधिकांश कांग्रेस शासित राज्यों की तुलना में बेहतर है।
इससे पहले असम विधानसभा के अध्यक्ष बिश्वजीत दैमारी ने राज्य में बिजली परिदृश्य पर चर्चा के लिए कांग्रेस विधायक भरत चंद्र नरह के कार्य स्थगन प्रस्ताव स्वीकार कर लिया, जबकि ऐसे दो अन्य प्रस्तावों पर चर्चा करने और महत्वपूर्ण विधेयकों और रिपोर्टों को सदन में रखने की अनुमति दी। जैसे ही प्रश्नकाल समाप्त हुआ, दैमारी ने कहा कि उन्हें कांग्रेस और दो अन्य विपक्षी विधायकों से बिजली परिदृश्य पर कार्य स्थगन प्रस्ताव के लिए दो नोटिस मिले हैं।