गुवाहाटी : मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्वशर्मा ने आज मंगलवार को इस आरोप को पूरी तरह से खारिज कर दिया कि उनके कार्यकाल में पैसे के बदले किसी भी उम्मीदवार को नौकरी दी गई है। उन्होंने कहा कि नौकरी देने की प्रक्रिया पूरी तरह साफ-सुथरी रही, इसमें किसी भी तरह की अनियमितता नहीं बरती गई। सीएम ने आज उपरोक्त आशय की बातें असम विधानसभा के चल रहे वर्तमान सत्र के दूसरे दिन कही। उन्होंने विपक्ष को चुनौती देते हुए कहा कि यदि कोई भी विधायक प्रमाण के साथ यह साबित कर देगा कि फलां उम्मीदवार को पैसे के बदले नौकरी दी गई है तो हम इसकी सीबीआई जांच कराने को तैयार हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके कार्यकाल में सरकारी भर्ती में किसी भी तरह का घोटाला नहीं हुआ है ।
उल्लेखनीय है कि एआईयूडीएफ की ओर से विधानसभा सत्र में पेश एक प्रस्ताव के जवाब में मुख्यमंत्री डॉ. शर्मा ने कहा कि पिछले दो वर्षों में लगभग 87,000 नौकरियां प्रदान की गई हैं और उनमें किसी भी तरह की अनियमितता नहीं बरती गई है। मुख्यमंत्री शर्मा ने तत्कालीन सरकार के नाम लिए बगैर कहा कि प्रदेश में पहले नकदी से नौकरियां खरीदने वाले लोगों के बारे में चर्चा होती थी, लेकिन अब ऐसा नहीं हो रहा है। उन्होंने कहा कि इस दौरान लोग पैसे देते हैं, लेकिन नौकरी नहीं मिलती हैं। सरकार की ओर से जो भी नौकरी दी गई है उसमें किसी तरह का लेनदेन और भाई-भतीजावाद नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि जहां उम्मीदवारों ने कथित तौर पर रिश्वत दी थी, लेकिन नौकरी पाने में असफल रहे।
मुख्यमंत्री ने सदन से असम की जनता को भरोसा दिलाते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में भर्ती में किसी भी तरह की अनियमितता नहीं बरती गई है, वहीं एआईयूडीएफ के विधायक अमिनुल इस्लाम ने कहा कि हालांकि सरकारी भर्ती की प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने की बात कर रही है, लेकिन वित्तीय लेनदेन के भी आरोप भी सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि अगर कोई सरकारी नौकरी देने के नाम पर भ्रष्टाचार में लिप्त है तो सरकार को इसे स्वीकार करना चाहिए और आश्वस्त करना चाहिए कि भविष्य में ऐसे घोटाले नहीं होंगे। इस बीच कांग्रेस के कमलाख्या दे पुरकायस्थ ने असम में कथित नौकरी के बदले नकदी घोटाले में कुछ भाजपा नेताओं की हालिया गिरफ्तारी का भी हवाला दिया।