न्यूयॉर्क : श्रीलंका ने चीन के जहाजों को अपने देश में रुकने की इजाजत नहीं दी है। श्रीलंका के विदेश मंत्री अली साबरी ने इसकी पुष्टि की। साबरी ने कहा कि भारत की चिंता हमारे लिए बेहद अहम है। हमने इसके लिए अब एक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) बनाया है और इसे बनाते वक्त भारत सहित दूसरे दोस्तों से सलाह भी ली थी। साबरी ने आगे कहा कि हमने अक्तूबर में चीनी जहाज को श्रीलंका आने की इजाजत नहीं दी है। इस पर अब भी बात की जा रही है। सुरक्षा को लेकर भारत की चिंता सही है और हमारे लिए बहुत जरूरी भी है। हम अपने क्षेत्र को शांति का जोन बनाना चाहते हैं। श्रीलंका में चीनी वेसल शियान 6 के डॉक होने पर भारत की चिंताओं के बारे में सवाल पूछे जाने पर श्रीलंका के विदेश मंत्री ने कहा अगर ये एसओपी के तहत होगा, तो हमें कोई दिक्कत नहीं है। लेकिन फिलहाल ऐसा कोई फैसला नहीं लिया गया है।  वहीं कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो की तरफ से भारत पर लगाए गए आरोपों पर श्रीलंका ने सीधे तौर पर कनाडा को लताड़ लगाई है और उसे आतंकियों का सुरक्षित पनाहगाह करार दिया है। 

विदेश मंत्री अली साबरी ने न्यूयॉर्क में यूएन महासभा से इतर भारत-कनाडा के बीच हाल ही में उपजे राजनयिक संकट पर बात की। उन्होंने कहा कि आतंकियों को उत्तरी अमरीका में स्थित इस देश में सुरक्षित पनाह मिल गई है और प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने इन चीजों से बाहर आने के लिए इस तरह के भड़कऊ आरोप लगाने का रास्ता अपनाया है। साबरी ने आगे कहा कि उन्हें कनाडा के पीएम के भड़काऊ और बिना सबूतों वाले बयानों पर उन्हें कोई आश्चर्य नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि कनाडा के प्रधानमंत्री ने अपनी बात के समर्थन में बिना कोई सबूत दिए ही ऐसे भड़काऊ आरोप लगा दिए। इससे पहले श्रीलंका के लिए भी उन्होंने यही किया था। एक डराने वाला सफेद झूठ बोला कि श्रीलंका में नरसंहार हुआ है। सभी को पता है कि हमारे देश में कोई नरसंहार नहीं हुआ था। श्रीलंका के विदेश मंत्री ने ट्रूडो को साफ संदेश देते हुए कहा कि उन्हें किसी भी स्वायत्त देश के मामलों में दखल देने का कोई अधिकार नहीं है। साबरी ने कहा कि मुझे लगता है कि किसी को भी दूसरे देशों के मामले में अपनी टांग नहीं अड़ानी चाहिए और यह नहीं बताना चाहिए कि हम अपने देश को कैसे चलाएं। 

साबरी ने हिंद महासागर के देशों को साथ आने का संदेश देते हुए कहा कि हम अपने देश को बाकियों की तरह ही प्यार करते हैं। हमारे लिए हिंद महासागर की पहचान काफी जरूरी है। हमें अपने क्षेत्र का ध्यान रखना होगा। हमें साथ काम करना होगा। इसी तरह हम शांतिपूर्ण माहौल बना सकते हैं। हमें किसी और की बातों में आकर अपने मामलों को नहीं देखना चाहिए। इतना ही नहीं श्रीलंका के विदेश मंत्री ने कनाडा की संसद में एक पूर्व नाजी सैनिक को सम्मानित किए जाने को लेकर भी कनाडा को घेरा। उन्होंने कहा कि मैंने  देखा कि कनाडा की संसद में कुछ लोग दूसरे विश्व युद्ध में नाजियों के लिए लडऩे वालेों का स्वागत कर रहे हैं। यह कई सवाल उठाता है ।