पिथौरागढ़ : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बृहस्पतिवार को उत्तराखंड के एक दिवसीय दौरे पर यहां पहुंचे जहां उन्होंने भगवान शिव के परिवार का निवास स्थान मानी जाने वाली आदि कैलाश चोटी के दर्शन किए और पार्वती कुंड के किनारे स्थित प्राचीन शिव-पार्वती मंदिर में पूजा-अर्चना की। दिन के अंत में पीएम ने पिथौरागढ़ में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि सुदूर पहाड़ों तथा देश के कोने-कोने में रहने वाले लोगों की भी उनकी सरकार ने चिंता की। उन्होंने कहा कि सिर्फ पांच वर्षों में देश में 13.5 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस बात पर दुनिया अचरज कर रही है। उन्होंने कहा कि इनमें से बहुत से लोग आपकी तरह ही पहाड़ों में, सुदूर इलाकों में रहते हैं। उन्होंने कहा कि ये साढ़े 13 करोड़ लोग इस बात का उदाहरण हैं कि भारत अपनी गरीबी मिटा सकता है। मोदी ने कहा कि पहले नारा दिया जाता था कि गरीबी हटाओ, मतलब आप हट जाओ। उन्होंने कहा कि अब मोदी कह रहा है कि हम मिलकर गरीबी हटाकर रहेंगे। हम जिम्मेदारी लेते हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज दुनिया में भारत का गौरवगान हो रहा है। उन्होंने कहा कि एक समय था जब देश में चारों तरफ निराशा का माहौल था और तब हर भारतीय सोचता था कि हजारों करोड़ के घोटालों से देश को मुक्ति मिले और दुनिया में भारत का यश बढ़े । उन्होंने कहा कि चुनौतियों से घिरी दुनिया में भारत की आवाज कितनी बुलंद होती जा रही है। जी20 के शानदार आयोजन से हम भारतीयों का लोहा दुनिया ने माना है। मोदी ने इसका श्रेय लोगों को देते हुए कहा कि अपने वोट के जरिए 30 साल बाद केंद्र में एक स्थिर और मजबूत सरकार चुनकर उन्होंने यह किया है। उन्होंने कहा कि यह आपके वोट की ताकत है। जब मैं दुनिया के बड़े-बड़े लोगों से हाथ मिलाता हूं तो उनसे आंख भी मिलाता हूं। और जब वे मेरी ओर देखते हैं तो मुझे नहीं, बल्कि 140 करोड़ हिंदुस्तानियों को देखते हैं।

प्रधानमंत्री ने सीमावर्ती क्षेत्रों में हो रही सुविधाओं के तेजी से हो रहे विकास का जिक्र करते हुए कहा कि यह काम पहले की सरकारों ने क्यों नहीं किया। इसका जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें डर था कि कहीं इसका फायदा उठाकर दुश्मन अंदर न आ जाए । उन्होंने कहा कि इसी डरी हुई सोच को पीछे छोड़कर भारत आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि न हम डरते हैं, न डराते हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की सीमा पर हम आधुनिक सड़के, सुरंगे और पुल बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में पिछले नौ वर्षों में 4200 किलोमीटर से ज्यादा लंबी सड़के बनाई गईं, सीमा पर 250 बड़े पुल और 22 सुरंगे बनाईं। आज के कार्यक्रम में भी अनेक पुलों का शिलन्यास हुआ है। उन्होंने कहा कि अब तो हम सीमावर्ती क्षेत्रों में रेलगाड़ियां तक लाने की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सीमांत गांवों को देश का अंतिम नहीं, बल्कि पहला गांव मानकर उनका विकास किया जा रहा है। इस संबंध में उन्होंने  वाइब्रेंट विलेज योजना का जिक्र किया और कहा कि सरकार का प्रयास है कि सीमांत गांवों से पलायन कर गए लोग वापस आएं । प्रधानमंत्री ने कहा कि माना जाता है कि पहाड़ का पानी और पहाड़ की जवानी पहाड़ के काम नहीं आती, लेकिन उन्होंने कहा कि उन्होंने संकल्प लिया है कि इस अवधारणा को वह बदल देंगे ।