गुवाहाटी : सोमवार रात असम विधानसभा परिसर में असम गण परिषद की केंद्रीय समिति के पदाधिकारियों की बैठक निष्फल हो गई। अगप के ज्यादातर नेता और कार्यकर्ता बड़ी आशा के साथ इस अहम बैठक का इंतजार कर रहे थे लेकिन उन्हें निराशा हाथ लगी। आगामी लोकसभा चुनाव में सीटों के बंटवारे को लेकर भाजपा और अगप दोनों सहयोगी दलों के बीच तनाव की स्थिति में यह बैठक आयोजित हुई। आगामी लोकसभा और पंचायत चुनावों की तैयारी के लिए पार्टी की भावी कार्ययोजना और संगठनात्मक पहलुओं पर चर्चा के साथ बैठक संपन्न हुई। बैठक में भाग लेकर अगप के वरिष्ठ नेता और विधायक फणी भूषण चौधरी ने कहा कि पार्टी के उम्मीदवारों को बरपेटा लोकसभा क्षेत्र में चुनाव लड़ना चाहिए। गौरतलब है कि बैठक में विधायक रमेंद्र नारायण कलिता शुरू से अंत तक उपस्थित रहे, लेकिन रहस्यमय तरीके से सीट के बंटवारे पर टिप्पणी करने से बचते रहे। कलिता, जो हाल ही में मीडिया के सामने बहुत सक्रिय और मुखर रहे, सोमवार की बैठक में वे रहस्यमय तरीके से चुप रहे। यह पहले से ही स्पष्ट है कि अगप को भाजपा द्वारा छोड़ी गई सीटों से ही संतुष्ट होना पड़ेगा। इसलिए, अगप अध्यक्ष या कार्यकारी अध्यक्ष यह नहीं बता पाए हैं कि पार्टी किन निर्वाचन क्षेत्रों में चुनाव लड़ेगी।
अगप अध्यक्ष अतुल बोरा ने बार-बार यह दावा किया है कि भाजपा और अगप के बीच सीटों को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई है। लेकिन सीएम डॉ. हिमंत विश्व शर्मा ने अतुल बोरा के दावों के बिल्कुल उलट बयान दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. शर्मा ने कहा कि सीटों का बंटवारा एक तरह से हो चुका है। दोनों पार्टियों के बीच कोई समस्या नहीं है। अंतिम सूची नई दिल्ली से घोषित की जाएगी। इसमें कोई खास बात नहीं है। इस बार सीट के बंटवारे को लेकर कोई दिक्कत नहीं है। हम भाई और दोस्त की तरह चुनाव खेलेंगे। गौरतलब है कि कुछ दिन पहले नई दिल्ली में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के आधिकारिक आवास पर हुई मैराथन बैठक में भाजपा ने अपने दो सहयोगियों, अगप और यूपीपीएल को सीटें छोडऩे का फैसला किया था।
बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. शर्मा और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष भवेश कलिता भी उपस्थित थे। बैठक के बाद भवेश कलिता ने अगप को एक सीट छोडऩे की घोषणा की थी। साफ है कि भाजपा नेतृत्व ने निर्देश पर ही भवेश कलिता ने यह घोषणा की थी। जिसके परिणामस्वरूप अब अगप अध्यक्ष अतुल बोरा एवं कार्यकारी अध्यक्ष केशव महंत और भी असहाय लग रहा है। पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं के नाराज होने के डर से व रणनीतिक राजनीतिक रुख अपना रहे हैं। जैसा कि मुख्यमंत्री ने कहा, अगप नेतृत्व के पास अंतिम सूची की घोषणा के लिए नई दिल्ली में भाजपा नेतृत्व की प्रतीक्षा करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।