पूर्वांचल प्रहरी डेस्क संवाददाता गुवाहाटी : प्रदूषण नियंत्रण परिषद और पुलिस-प्रशासन की बंदिशों के बावजूद दिवाली पर ध्वनि प्रदूषण ने पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य प्रदूषण नियंत्रण परिषद और कामरूप मेट्रोपॉलिटन जिला प्रशासन को दिवाली के दौरान केवल दो घंटे के लिए हरित पटाखों के उपयोग के लिए दिशा-निर्देश जारी किया था, लेकिन हकीकत में सब कुछ धरा का धरा ही रह गया। दिवाली के दौरान गुवाहाटी शहर में ध्वनि प्रदूषण का स्तर बढ़ गया।  पिछले साल की तुलना में इस साल दिवाली के दौरान वायु गुणवत्ता सूचकांक काफी बढ़ गया है। असम प्रदूषण नियंत्रण परिषद के अनुसार, गुवाहाटी में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) पिछले साल दिवाली के दौरान 225 के उच्चतम स्तर से बढ़कर इस साल 260 हो गया।

गुवाहाटी के चार स्टेशनों पर एक्यूआई क्रमश: बामुनिमैदाम में 260, पानबाजार में 240, आईआईटी गुवाहाटी में 207 और बोरझार हवाई अड्डे पर 220 था। प्रदूषण नियंत्रण परिषद के सूत्रों ने बताया कि बामुनिमैदाम के आवासीय क्षेत्र में वायु गुणवत्ता सूचकांक पिछले साल 220-230 के बीच था, लेकिन इस साल दिवाली की पहली रात में यह 260 के एक्यूआई को छू गया। परिषद के सूत्रों ने कहा कि इसी तरह दिवाली के दौरान गुवाहाटी के बाद नलबाड़ी शहर में वायु गुणवत्ता सूचकांक बढ़ गया। शहर के प्रदूषण नियंत्रण परिषद (पीसी) और पुलिस प्रशासन ने दिवाली पर रात 8 बजे से रात 10 बजे तक केवल दो घंटे के लिए हरित पटाखों के उपयोग की अनुमति दी थी। लेकिन पुलिस और प्रशासन के सामने रात भर गुवाहाटी शहर में खूब पटाखे फोड़े गए और आतिशबाजी की गई। प्रशासन ने हाई कोर्ट, जीएमसीएच और असम सचिवालय जैसे शांत क्षेत्रों में पटाखे फोडऩे और आतिशबाजी जलाने पर प्रतिबंध लगा दिया था, लेकिन जनता भवन से सटे मंत्री आवास पर खुद सीएम डॉ. शर्मा और उनके साथी मंत्री-विधायक घंटों तक आतिशबाजी करते दिखे।