पूर्वांचल प्रहरी डेस्क संवाददाता गुवाहाटी : मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्व शर्मा की अध्यक्षता में बृहस्पतिवार को दिसपुर में आयोजित राज्य कैबिनेट की बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। कैबिनेट ने फैसला लिया कि अब असम उच्च माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सेबा) या असम उच्चतर माध्यमिक शिक्षा संसद (एएचएसईसी)नहीं रहेंगे। सेबा और एएचएसईसी को विलय कर असम राज्य स्कूल शिक्षा बोर्ड का गठन किया जाएगा। कैबिनेट के फैसले पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में राज्य सरकार के प्रवक्ता एवं मंत्री जयन्त मल्लबरुवा ने कहा कि जल्द ही सेबा और एएचएसईसी को विलय करके राज्य स्कूल बोर्ड बनाने के लिए विधानसभा में एक विधेयक पेश किया जाएगा। इस विधेयक के आने पर ही नए बोर्ड का पूरा ढांचा स्पष्ट हो पाएगा। नए बोर्ड में एक अध्यक्ष और दो उपाध्यक्ष होंगे। छठी से दसवीं तक की कक्षाएं एक उपाध्यक्ष के तथा ग्यारहवीं और बारहवीं कक्षाएं दूसरे उपाध्यक्षके अधीन होंगी। नई शिक्षा नीति के मुताबिक मैट्रिक की परीक्षा नहीं होगी, केवल बारहवीं कक्षा की परीक्षा ही स्कूली शिक्षा की मुख्य परीक्षा होगी। ऐसी अटकलें हैं कि नए राज्य स्कूल बोर्ड का कार्यभार वर्तमान एसईबीए अध्यक्ष रमेश चंद्र जैन को सौंपा जाएगा।
गौरतलब है कि मैट्रिक प्रश्नपत्रों के लीक होने सहित कई विवादों के बावजूद सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी (नामांकित) रमेश चंद जैन 2016 से सेबा के अध्यक्ष रूप में कार्यरत हैं। सरकार बदल गई लेकिन सेबा के अध्यक्ष रमेश चंद जैन अपने पद पर बने रहे। मुख्यमंत्री से निकटता के कारण जैन लगभग एक दशक तक एसईबीए के अध्यक्ष रहे हैं। दिसपुर के एक शीर्ष सूत्र ने कहा कि सरकार जैन का कार्यकाल समाप्त होने से पहले राज्य स्कूल बोर्ड का गठन करेगी और उन्हें फिर से बोर्ड का अध्यक्ष नियुक्त करेगी। सेबा ने हाल ही में राज्य सरकार में 26,000 भर्तियों और स्वास्थ्य विभाग में कई विवादास्पद भर्तियों के लिए लिखित परीक्षा आयोजित की है। रमेश चंद जैन ने दावा किया है कि 26,000 भर्ती के लिए चयन परीक्षा सुचारू रूप से आयोजित की गई थी, लेकिन आज तक सेबा 26,000 भर्ती के लिए उम्मीदवारों द्वारा प्राप्त अंक, कट-ऑफ अंक आदि सार्वजनिक नहीं कर पाए। मंत्री जयंत मल्ल बरुवा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में घोषणा की कि कैबिनेट ने 5 फरवरी से बजट सत्र आयोजित करने का भी फैसला किया। उन्होंने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष को कैबिनेट के फैसले के बारे में सूचित किया जाएगा।