एजल/ नई दिल्ली : भारत के पड़ोसी देश म्यामां में सेना और विद्रोही गुट पीपुल्स डिफेंस फोर्सेस (पीडीएफ) के बीच 12 नवंबर से लड़ाई हो रही है। 14 नवंबर को म्यामां सेना ने भारत सीमा से सटे इलाकों खावमावी और रिहखावदार गांवों पर एयर स्ट्राइक की। इसके चलते भारत की सीमा पारकर म्यामां के 5 हजार से अधिक लोगों ने मिजोरम में शरण ली। हमले में एक 51 साल के व्यक्ति की मौत हो गई थी। मिजोरम में शरण लेने वाले म्यामां के लोग चम्फाई जिले के जोखावथार इलाके में रह रहे हैं। जोखावथार इलाके में 4-5 राहत और शरणार्थी कैम्प हैं, जिनमें म्यामां के लगभग 160 परिवार रह रहे हैं। जिला प्रशासन, एनजीओ, यंग मिजो एसोसिएशन (वाईएमए) और ग्राम परिषद की ओर से इन शरणार्थियों की मदद की जा रही है। साथ ही इन्हें इलाके में बने अस्थाई टेंट में जगह दी गई है। शासन-प्रशासन और एनजीओ की ओर से इन्हें खाना, कपड़ा और दवाएं दी जा रही हैं।

वाईएमए के फाइनेंशियल सेक्रेटरी एफ बियाक्टिंसांगा ने बताया कि कुछ गैर-सरकारी संगठनों और प्रशासन की ओर से इनकी मदद की जा रही है। बियाक्टिंसांगा ने कहा कि यहां कई सारे बच्चे और महिलाएं हैं। उनके लिए दाल, बच्चों के लिए सेरेलक, दूध और दवाई के साथ-साथ डाइपर, कपड़े और कंबल-गद्दे का इंतजाम वाईएमए की ओर से किया जाता है। वहीं, म्यामां की पीपुल्स डिफेंस फोर्स (पीडीएफ) ने रविवार शाम को म्यामां सेना की दो चौकियों पर हमला कर उन पर कब्जा कर लिया। दूसरी ओर भारत ने बृहस्पतिवार को अपनी सीमा के पास म्यांमा की सेना और सैन्य शासन विरोधी समूहों के बीच लड़ाई को रोकने का आह्वान किया, जिससे मिजोरम में पड़ोसी देश के शरणार्थियों की आमद बढ़ गई है। पिछले कुछ हफ्तों में भारत से सटी सीमा के पास कई प्रमुख कस्बों और क्षेत्रों में म्यांमा के सैन्य शासन विरोधी समूहों और सरकारी बलों के बीच संघर्ष बढ़ गया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने अपनी साप्ताहिक प्रेसवार्ता के दौरान भारत-म्यांमा सीमा के नजदीक हिंसा की घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त की।