गुवाहाटी : असम विधानसभा के आगामी शीतकालीन सत्र के आयोजन पर अनिश्चितता है। विधानसभा सचिवालय या राज्य सरकार ने अभी तक आधिकारिक तौर पर इस मामले पर अंतिम निर्णय की घोषणा नहीं की है, लेकिन  किसी कारणवश यह बहुचर्चित सत्र रद्द कर दिया गया है। गौरतलब है कि विधानसभा अध्यक्ष विश्वजीत दैमारी ने घोषणा की थी कि कैबिनेट मीटिंग की तरह विधानसभा के विभिन्न सत्र भी राज्य के विभिन्न स्थानों पर आयोजित किया जाएगा। तदनुसार गुवाहाटी के बाहर पहली बार के लिए विधानसभा  सत्र कोकराझाड़ में आयोजित करने का निर्णय लिया गया था। हिमंत विश्व शर्मा की सरकार ने कैबिनेट की बैठक में भी इस संबंध में औपचारिक निर्णय लिया था। विधानसभा अध्यक्ष विश्वजीत दैमारी पहले ही सत्र की तैयारियों का निरीक्षण करने के लिए दो बार कोकराझाड़ का दौरा कर चुके हैं। इन कोशिशों के बावजूद विधानसभा का शीतकालीन सत्र कोकराझार में नहीं होगा।

विधानसभा सचिवालय के एक सूत्र के अनुसार बोड़ोलैंड प्रांतीय विधानसभा भवन में केवल 40 पार्षद बैठ सकते हैं। भवन में इससे अधिकबैठने की कोई और व्यवस्था नहीं की जा सकती। लेकिन असम विधानसभा में 126 विधायक हैं। विधानसभा सत्र में ये 126 विधायक कैसे बैठेंगे, इसे लेकर पेंच फंसा हुआ है। परिषद भवन में सीटों की संख्या 40 से बढ़ाकर 126 करने के लिए मौजूदा भवन को तोड़कर पूरे भवन का पुनर्निर्माण करना होगा। इसके लिए करोड़ों रुपए की जरूरत होगी। फिलहाल असम सरकार का खजाना इतना मजबूत नहीं है कि सिर्फ साठ दिनों के लिए इतनी बड़ी रकम खर्च कर सके। वर्तमान बीटीआर विधानसभा भवन में असम विधानसभा आयोजित करने के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे का भी अभाव है। मुख्य भवन में मंत्रियों और विधायकों के अलावा बड़ी संख्या में नौकरशाहों, पत्रकारों आदि के लिए भी बैठने की व्यवस्था होनी चाहिए।

मौजूदा बिल्डिंग में यह सुविधा काफी सीमित है। ऐसी सुविधाओं या बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए काफी समय और धन की आवश्यकता होगी। इसलिए, सरकार को कोकराझाड़ में असम विधानसभा सत्र आयोजित करने जैसी महत्वाकांक्षी योजना को छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा है। परिषद भवन के बुनियादी ढांचे के अलावा कोकराझार शहर में मंत्रियों, विधायकों, नौकरशाहों, सुरक्षा गार्डों आदि के लिए आवास की व्यवस्था करना चुनौतीपूर्ण होगा। राज्य प्रशासन के अधिकारियों के अलावा कायक्रम स्थल पर बड़ी संख्या में असम सचिवालय के अधिकारी और कर्मचारी भी मौजूद रहेंगे। सत्र के दिनों से और काफी पहले से ही कोकराझार में एक अस्थायी विधानसभा सचिवालय स्थापित करने की भी आवश्यकता है। इसके लिए बड़ी मात्रा में धन की आवश्यकता होगी। इसलिए आखिरकार कोकराझार में विधानसभा सत्र का आयोजन रद्द होने की पूरी संभावना है।