शिलांग : सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत से समृद्ध पूर्वोत्तर राज्य में पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इस क्षेत्र के 15 पर्यटन स्थलों को केंद्र सरकार की ‘स्वदेश दर्शन 2.0’ योजना के तहत विकसित किया जाएगा। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि इनमें मणिपुर के एक और पूर्वोत्तर के सात अन्य राज्यों से दो-दो स्थलों का चयन किया गया है। इस कदम का उद्देश्य न केवल आठ राज्यों में पर्यटन को बढ़ावा देना है, बल्कि क्षेत्र के अग्रिम विकास में भी मदद करना है। पूर्वोत्तर के कई राज्य पड़ोसी देशों से भी सीमा साझा करते हैं। ये राज्य अपनी प्राचीन सुंदरता, खूबसूरत पहाड़ियों, सुंदर झरने और रोमांचकारी रास्तों के लिए लोकप्रिय हैं और इनमें से कई स्थल तो ऐसे हैं, जिन्हें बहुत कम पर्यटकों ने ही देखा है।

पर्यटन मंत्रालय के अधिकारियों ने 21-23 नवंबर  तक शिलांग में आयोजित होने वाले अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन मार्ट (आईटीएम) के 11वें संस्करण के दौरान ‘स्वदेश दर्शन 2.0’ योजना और ‘तीर्थयात्रा कायाकल्प और आध्यात्मिक संवर्द्धन अभियान’ (प्रसाद) योजना पर विवरण साझा किया। मंत्रालय ने अपने उद्घाटन दिवस पर घोषणा की थी कि उसने ‘प्रसाद’ योजना के तहत मेघालय में चार प्रमुख प्रतिष्ठित धार्मिक पर्यटन स्थलों के विकास के लिए 29.32 करोड़ रुपए मंजूर किए थे। केंद्रीय पर्यटन राज्य मंत्री श्रीपाद नाइक ने यहां सम्मेलन का उद्घाटन करने के बाद कहा कि केंद्र पूर्वोत्तर क्षेत्र में और अधिक विकास के लिए काम कर रहा है, साथ ही स्थिरता पर भी जोर दे रहा है। अधिकारियों ने बताया कि सरकार अपनी ‘स्वदेश दर्शन 2.0’ योजना के माध्यम से क्षेत्र में पर्यटन स्थलों के महत्व को बढ़ाने के लिए कदम उठा रही है।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के परामर्श से मंत्रालय द्वारा ‘स्वदेश दर्शन 2.0’ योजना के तहत विकास के लिए पूर्वोत्तर में 15 स्थलों का चयन किया गया है। नाचो और मेचुका को अरुणाचल प्रदेश से चुना गया है; मेघालय से शिलांग और सोहरा, मिजोरम से एजल और चंपई, असम से जोरहाट और कोकड़ाझार, मणिपुर में मोइरांग (विष्णुपुर), नगालैंड में निउलैंड और चुमुकेदिमा, सिक्किम में गंगटोक और ग्यालशिंग और त्रिपुरा में अगरतला और उनाकोटि को चुना गया है। सरकार ने पहले कहा था कि पर्यटन मंत्रालय ने स्थानीय समुदायों के लिए स्व-रोजगार सहित नौकरियां पैदा करने, स्थानीय सांस्कृतिक और प्राकृतिक संसाधनों को संरक्षित करने और बढ़ाने के उद्देश्य से अपनी स्वदेश दर्शन योजना को नया रूप दिया है।