पूर्वांचल प्रहरी निज संवाददाता धुबड़ी : यात्री भी भरपूर हैं और टिकट के लिए वेटिंग लिस्ट जैसे हालात बावजूद पश्चिम असम के एकमात्र रुपसी एयरपोर्ट से फ्लाईबिग ने बिते 20 दिनों से अपनी सेवाएं बंद कर रखी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट उड़े देश का आम नागरिक की महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत दशकों बाद खुलने वाले रुपसी एयरपोर्ट से उड़ान की सेवाएं बंद हैं। बावजूद एयरलाइंस कंपनी फ्लाई बिग से लेकर भारतीय विमानन प्राधिकरण,शासन, प्रशासन व भाजपा नेतृत्वाधीन राज्य व केंद्र सरकार की ओर से अब तक कोई भी ठोस व स्पष्ट जवाब नहीं मिल पाया है कि आखिर क्यों समग्र पश्चिम असम के आम यात्रियों को उड़ान सेवा से वंचित रखा जा रहा है। इस सवाल के साथ यह पूरा प्रकरण अब संदेह व षड्यंत्र के आवर्त में घिर गया है। इसे लेकर आम लोगों विशेषकर यात्रियों में जबरदस्त नाराजगी देखी जा रही है। मालूम हो कि बीते 7 नवंबर से रुपसी से विमान की आवाजाही बंद है। मालूम हो कि केंद्र सरकार की परियोजना उड़ान -2 व उड़ान -4 के तहत चार दशकों से बंद इस रुपसी एयरपोर्ट को इसकी भौगोलिक व ऐतिहासिक स्थिति व महत्ता को देखते हुए खोला गया।
तथा भारतीय विमानन प्राधिकरण के साथ एक समझौते के तहत फ्लाई बिग नामक निजी विमानन सेवा कंपनी ने 8 मई 2021 को यहां से गुवाहाटी व कोलकाता के लिए यात्री सेवाएं शुरू की। कहा जा रहा है कि एयरक्राफ्ट की मरम्मत के लिए कंपनी ने सेवाओं को बंद किया है। जो दलील अपने आप में हास्यास्पद है। ऐसे में इस पूरे प्रकरण में बड़ी धांधली व षड्यंत्र का संदेह किया जा रहा है। अंदरुनी सत्रों के मुताबिक चौंकाने वाली बात यह है कि फ्लाई बिग कंपनी ने समग्र पूर्वोत्तर में उड़ान योजना के तहत सरकार से मोटी सब्सिडी पर आगामी 2024 के जून महीने तक एयरलाइंस चलाने का एक तरह से ठेका ले रखा है। आश्चर्यजनक रूप से कंपनी महज दो एयरक्राफ्ट के जरिए वह भी किराए पर लेकर प्लेन उड़ा रही है। सूत्रों के मुताबिक कंपनी सरकार से तो आगामी 2024 जून महीने तक का समझौता कर रखी है, परंतु इसके पास अब एयरक्राफ्ट ही नहीं है। क्योंकि जिस कंपनी से फ्लाई बिग ने दो एयरक्राफ्ट किराए पर लिए थे उसकी मियाद इस साल खत्म हो गई है। ऐसे में यह पूरा मामला अब बड़ी धांधली व षड्यंत्र से घिरा हुआ नजर आ रहा है। भारतीय विमानन प्राधिकरण, फ्लाईबिग कंपनी व संबंधित पक्ष की भूमिका अब पूरी तरह से संदेह के घेरे में है। आम लोगों द्वारा अब केंद्र सरकार के नागरिक उड्डयन मंत्रालय से इस पूरे मामले पर हस्तक्षेप की मांग की जा रही है।