गुवाहाटी : नागरिकता के आधार वर्ष पर सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय संवैधानिक पीठ ने मंगलवार को सुनवाई शुरू कर दी। असम के मूल निवासियों की सुरक्षा पर बहुप्रतीक्षित मामले की सुनवाई में मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति धनंजय यशवंत चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली संवैधानिक पीठ में न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश, न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा शामिल थे। भारत के प्रसिद्ध वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने सुनवाई में महासंघ-अहोम सभा आदि की ओर से ब्रिटिश औपनिवेशिक सरकार से लेकर वर्तमान सरकार तक विदेशी आक्रमण से असम को हुई क्षति के बारे में विस्तार से बताया।
उन्होंने यांडाबू संधि, ब्रिटिश शासन, स्वदेशी भूमि और संपत्तियों पर विदेशियों का कब्जा करने, घरों को जलाने, हत्याएं, वोट बैंक के लिए राजनीतिक दलों द्वारा विदेशियों को संरक्षण देने, विदेशियों को मतदान का अधिकार देकर स्वदेशी लोगों को राजनीतिक अधिकारों से वंचित करने, असम में असमिया बोलने वालों और स्वदेशी जातीय बोलने वालों की संख्या में कमी आने, बांग्ला भाषी लोगों की संख्या में वृद्धि होने, नेली, कोकराझाड़, चिरांग, बाक्सा, उदलगुड़ी, धुबड़ी आदि जगहों में हुई झड़पें, हत्याएं आदि के बारे में भी तथ्य प्रस्तुत किए। इसके अलावा असम में विदेशी समस्या के संदर्भ में भारत के विधि आयोग की रिपोर्ट, हरिशंकर ब्रह्म समिति की रिपोर्ट, असम के पूर्व राज्यपाल एसके सिन्हा की रिपोर्ट, आईएमडीटी एक्ट को असंवैधानिक बताकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा रद्द करने और विदेशियों को मूक आक्रमणकारी बताने वाली रिपोर्ट आदि द्वारा तथ्य प्रस्तुत करके उन्होंने नागरिकता अधिनियम की धारा 6(ए) को असंवैधानिक, मनमाना और पक्षपातपूर्ण बताते हुए इसे तत्काल रद्द करने का आह्वान किया।
सुनवाई में अधिवक्ता दीवान की सहायता अधिवक्ता समीरन शर्मा ने की। मुख्य न्यायाधीश ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से पूछा कि नागरिकता अधिनियम की धारा 6 (ए) के तहत कितने विदेशियों को नागरिकता दी गई है। इस पर मेहता ने कहा कि वे इसका जवाब दो या तीन दिनों में दे सकते हैं। सुनवाई अधूरी रही, बुधवार सुबह 10.30 बजे से फिर सुनवाई होगी।