पूर्वांचल प्रहरी कार्यालय संवाददाता शिलांग: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को कहा कि मोदी सरकार के नेतृत्व में पिछला 10 साल पूर्वोत्तर के लिए स्वर्ण युग रहा है, जिसमें बुनियादी ढांचे के विकास और संघर्षों के समाधान पर अभूतपूर्व ध्यान दिया गया है। शाह ने कहा कि पूर्वोत्तर आज नाकेबंदी और अशांति के अपने इतिहास से हटकर शांति और विकास की ओर बढ़ रहा है। यहां पूर्वोत्तर परिषद (एनईसी) के 71वें पूर्ण सत्र को संबोधित करते हुए शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में बुनियादी ढांचे के निर्माण से न सिर्फ पूर्वोत्तर से दिल्ली और शेष भारत की दूरी कम हुई, बल्कि दिलों की दूरी भी कम हुई है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार के तहत पिछले 10 साल पूर्वोत्तर के लिए सबसे महत्वपूर्ण दशक हैं क्योंकि आजादी के बाद के 75 वर्षों में यहां सबसे अधिक विकास हुआ है। शाह ने कहा कि जो पूर्वोत्तर जातीय, भाषाई, सीमावर्ती और चरमपंथी समूहों के कारण विभिन्न समस्याओं से जूझ रहा था, उसमें इन 10 वर्षों में शांति के एक नए और टिकाऊ युग की शुरुआत हुई।
गृह मंत्री ने कहा कि अगर पूर्वोत्तर के इन 10 वर्षों की तुलना देश की आजादी के बाद के 75 वर्षों से की जाए तो यह दशक निश्चित रूप से इस क्षेत्र के लिए स्वर्णिम काल माना जाएगा। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने हमेशा पूर्वोत्तर को भारत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना है। शाह ने कहा कि 2004 से 2014 के बीच पूर्वोत्तर में कुल 11,121 हिंसक घटनाएं हुईं और 2014 से 2023 के बीच यह 73 प्रतिशत घटकर 3,114 रह गई हैं। उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों के कर्मियों की जान जाने की घटनाओं में 71 प्रतिशत की गिरावट आई है, जो 458 से घटकर 132 हो गई है, जबकि आम लोगों की मृत्यु के मामलों में 86 फीसदी की गिरावट आई है। शाह ने कहा कि उग्रवाद की घटनाओं में कमी आई है क्योंकि पिछले पांच वर्षों में उग्रवादी समूहों के 8,900 से अधिक सदस्यों ने आत्मसमर्पण किया है और मुख्यधारा में शामिल हुए हैं।
उन्होंने कहा कि इससे पूरे देश को यह संदेश गया है कि शांति और समृद्धि एक दूसरे से जुड़े हुए हैं और इनके बिना राज्यों का विकास नहीं हो सकता। गृह मंत्री ने कहा कि पूर्वोत्तर में शांति और स्थिरता लाने के लिए मोदी सरकार ने नौ समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं और इनके माध्यम से कानून-व्यवस्था के कई मुद्दों का सफलतापूर्वक हल किया गया है। उन्होंने कहा कि असम और मणिपुर के कुछ हिस्सों को छोड़कर, 2018 में सशस्त्र बल विशेष अधिकार अधिनियम (आफस्पा) के तहत आने वाले क्षेत्रों में से 75 प्रतिशत क्षेत्र को इससे मुक्त कर दिया गया है। गृह मंत्री ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के समय पूर्वोत्तर के विकास को प्राथमिकता दी गई थी जब क्षेत्र के लिए एक अलग मंत्रालय बनाया गया था। उन्होंने कहा कि आज प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में 'एक्ट ईस्ट, एक्ट फास्ट और एक्ट फस्र्ट' के तीन मंत्रों को लागू किया जा रहा है।
शाह ने कहा कि मोदी सरकार ने पूर्वोत्तर के लिए 2022-23 से 2025-26 तक 4,800 करोड़ रुपए आवंटित किए हैं और यह क्षेत्र के लिए बजट में लगभग 162 प्रतिशत की वृद्धि है। गृह मंत्री ने कहा कि पिछले 10 वर्षों में, मोदी सरकार ने रेलवे में 81,000 करोड़ रुपए और सड़क कनेक्टिविटी में 48,000 करोड़ रुपए का निवेश किया है और भारत माला परियोजना के तहत पूर्वोत्तर में 5,196 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण किया गया है। उन्होंने कहा कि उड़ान योजना के तहत इन 10 वर्षों में आठ नए हवाई अड्डों का निर्माण किया गया है और 71 नए हवाई मार्ग शुरू किए गए हैं। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में 'एक्ट ईस्ट पॉलिसी' के तहत पूर्वोत्तर परिषद (एनईसी) की भूमिका और दायरा बढ़ा है।