नई दिल्ली : अमरीकी राष्ट्रपति चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप ने जीत हासिल कर ली है। चुनावों में डोनाल्ड ट्रंप और कमला हैरिस के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला। डोनाल्ड ट्रंप का दोबारा से राष्ट्रपति बनने के बाद उसका भारत और अमरीका के संबंधों पर सीधा असर देखने को मिलेगा। अमरीका की रूस और चीन के साथ बढ़ती नाराजगी और ब्रिक्स सम्मेलन में भारत का इन दोनों देशों के करीब आना भारत और अमरीका के रिश्तों में तनाव जरूर पैदा किया है। हालांकि, आजादी के बाद से भारत और अमरीका के संबंध कभी मधुर तो कभी असमंजस भरी स्थिति में रहे हैं। डोनाल्ड ट्रंप का दोबारा से राष्ट्रपति चुनाव जीतकर व्हाइट हाउस में आने के भारत के लिए कई मायने छिपे हैं। डोनाल्ड ट्रंप और नरेंद्र  मोदी की दोस्ती की चर्चा बीते लंबे समय से रही है। दोनों की कैमिस्ट्री ने बीते सालों में लाखों लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। साल 2019 में टेक्सास में आयोजित हाउडी मोदी कार्यक्रम में दोनों नेता एक साथ नजर आए थे। वहीं इसके बाद भारत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का स्वागत 1 लाख 20 हजार लोगों के सामने किया था। दोनों ने अपने भाषणों में कई बार एक दूसरे की तारीफ भी की है। इसी कड़ी में आइए जानते हैं डोनाल्ड ट्रंप के चुनाव जीतने के बाद इसका भारत के ऊपर क्या असर पड़ेगा?

एच 1बी वीजा : डोनाल्ड ट्रंप शुरू से ही घरेलू विकास, राष्ट्रवाद और सीमाओं की सुरक्षा को लेकर प्रतिबद्ध रहे हैं। ऐसे में अमरीका के एच1 बी वीजा कार्यक्रम में कई बदलाव देखने को मिल सकते हैं। ट्रंप के पहले शासन काल में एच1बी वीजा की पात्रता की शर्तों को काफी सख्त कर दिया गया था। ट्रंप के दोबारा आने के बाद इमिग्रेशन और  एच1बी वीजा की नीतियों में कठोर और प्रतिबंधात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। इसका सीधा असर भारत के उन लोगों के ऊपर पड़ेगा, जो अमरीकी बाजार में नौकरी की तलाश कर रहे हैं। इसके अलावा जो लोग गैर कानूनी ढंग से मैक्सिको और कनाडा के रास्ते डंकी के जरिए अमरीका में घुसते हैं उसको लेकर भी ट्रंप नए और सख्त नियम ला सकते हैं।

ट्रेड नीतियां : ट्रंप ने अपने चुनाव प्रचार में तेज आर्थिक विकास पर जोर दिया है। इस कारण दोबारा से सत्ता में लौटने के बाद ट्रंप उन्हीं व्यापार नीतियों पर जोर देंगे जो अमरीकी केंद्रीत हैं। इसके अलावा अमरीका भारत पर ट्रेड बैरियर्स और टैरिफ को कम करने के लिए जोर डालेगा। इसका सीधा प्रभाव भारत के आईटी, फार्मास्यूटिकल्स और टैक्सटाइल इंडस्ट्री पर देखने को मिलेगा। इसके अलावा ट्रंप शासन काल में रेसिप्रोकल टैक्स को भी लागू किया जा सकता है। इसका जिक्र उन्होंने चुनाव प्रचार में भी किया था। 

डिफेंस : बीते सालों में भारत और अमरीका के बीच सैन्य सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर कई बड़े समझौते हुए हैं। ट्रंप के दोबारा सत्ता में लौटने के बाद भारत अमरीका के बीच सैन्य और रक्षा से जुड़े मसलों पर आगे भी कई बड़े समझौते हो सकते हैं। साउथ एशिया में चीन का बढ़ता वर्चस्व और उसकी विस्तारवादी नीतियों से मुकाबला करने के लिए दोनों देश एक साथ आगे आ सकते हैं। मड जैसे समूह जिसमें भारत, अमरीका, जापान और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं उस पर ध्यान केंद्रित किया जा सकता है।