पूर्वांचल प्रहरी कार्यालय संवाददाता गुवाहाटीः बिहार की स्वर कोकिला शारदा सिन्हा अब नहीं रहीं, उनके निधन की खबर सुन पूरे भारत के लोग उदास हुए। छठ पर्व के दौरान उनके चले जाने पर लोगों को बहुत ठेस पहुंची। लोगों का कहना है कि शारदा सिन्हा आज हमारे बीच नहीं है, लेकिन प्रदेशों के साथ विदेशों का ऐसा कोई छठ घाट नहीं है जहां उनके गाए गीत नहीं सुनाई दे रहे हैं। आज भी ये गीत छठ के समय बजते हैं तो ना केवल बड़े, आज की युवा पीढ़ी भी इन्हें उतने ही प्यार से सुनती और गुनगुनाती है।  वहीं छठ महापर्व पर घाटों पर विख्यात उद्योगपति रतन टाटा को भी याद किया गया। उल्लेखनीय है गुवाहाटी के कई घाटों के साथ ही असम के विभिन्न घाटों पर शरदा सिन्हा को श्रद्धांजलि दी गई। लोगों का कहना है कि हम पूरे साल भले ही शारदा सिन्हा के गाए गीत नहीं सुने, लेकिन छठ पूजा के दौरान उनके गीत के बिना छठ पूजा अधूरी लगती है। छठ पूजा के मौके पर महिलाओं ने कहा कि शारदा सिन्हा का योगदान सिर्फ  उनके गीतों तक सीमित नहीं था। उन्होंने छठ पूजा को एक सांस्कृतिक धरोहर के रूप में समाज में स्थापित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। एक श्रद्धालु महिला ने कहा कि आज भी जब हम छठ गीत गाते हैं,तो उनकी यादें हमारे दिलों में ताजगी और श्रद्धा का संचार करती है। उल्लेखनीय है कि गुवाहाटी के सभी छठ घाटों पर शारदा सिन्हा के अधिकांश छठ के गीत गुंज रहे थे। लोग उनके गीतों को सुनकर काफी भावुक नजर आए।