भारत के दो पड़ोसी चीन और पाकिस्तान की सामरिक तैयारी को ध्यान में रखकर भारत सरकार ने अपनी सेना के तीनों अंगों के आधुनिकीकरण के लिए रोडमैप बनाकर तैयारी शुरू कर दी है। भारत के सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने भी शुक्रवार को कहा कि चीन के साथ अनसुलझे सीमा विवाद भारत की सबसे बड़ी राष्ट्रीय सुरक्षा चुनौती है। पाकिस्तान द्वारा चलाये जा रहे छद्म युद्ध और हजारों जख्मों से भारत को लहूलुहान करने की उसकी नीति दूसरी सबसे गंभीर चुनौती है। क्षेत्रीय अस्थिरता और उसके प्रभाव को तीसरी बड़ी चुनौती के रूप में देखा जा सकता है। भारत के आसपास के देशों में चल रही राजनीतिक अस्थिरता गंभीर ङ्क्षचता का विषय है। श्रीलंका तथा बांग्लादेश के बाद नेपाल में भी भ्रष्टाचार एवं सोशल मीडिया पर लगे बैन को लेकर वहां की युवा पीढ़ी सड़कों पर है। स्थिति लगातार बेकाबू होती जा रही है। इसका नतीजा यह हुआ है कि प्रधानमंत्री ओपी शर्मा ओली को इस्तीफा देकर देश छोड़ना पड़ा है। रूस-यूक्रेन युद्ध से भी भारत को सबक मिला है। युद्ध के समय हथियारों एवं गोला-बारूदों के क्षेत्र में आत्मनिर्भर होना बड़ी बात है। युद्ध के वक्त हथियार आपूॢत करने वाले देश ब्लैकमेल करने पर उतर जाते हैं। भारत ने स्थिति का आकलन कर रक्षा के क्षेत्र में देश को आत्मनिर्भर बनाने की पहल शुरू की है। भारतीय सेना को अगले पंद्रह सालों में 2200 टैंक तथा 6 लाख गोले दिये जाएंगे। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सेना के तीनों अंगों को मजबूत करने के लिए एआई तकनीक से लैस हथियार और राडार भी खरीदे जाएंगे। चीन द्वारा ङ्क्षहद महासागर में अपनी उपस्थिति बढ़ाने के प्रयासों को देखते हुए भारत ने भी कमर कसना शुरू कर दिया है। ऑपरेशन ङ्क्षसदूर के वक्त आई चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए भारत ने हिंद महासागर से लेकर अरब सागर एवं बंगाल की खाड़ी तक तैयारी शुरू कर दी है। नौसेना को 2027 तक तीसरा एयर क्राफ्ट कैरियर मिलेगा। 15 सालों के रोडमैप के दौरान सेना, नौसेना एवं वायु सेना का तेजी से आधुनिकीकरण किया जाएगा। अत्याधुनिक युद्धपोतों एवं विध्वंसकों से लैस किये जाने की योजना है। चीन जिस तरह से इस क्षेत्र पर नजर गड़ाए हुए है उसको देखते हुए भारत को भी चौकन्ना रहना पड़ेगा। नेवी को दो इलेक्ट्रो मैग्नेटिक एयर क्राफ्ट लांच सिस्टम, अगली पीढ़ी के दस विध्वंसक, ब्रिगेड और अगली पीढ़ी के ही साथ कार्वेट की जरूरत है। एंटीशिप वेपन और सेंसर लगाने की भी जरूरत है। छोटे आकार के ये युद्धपोत सतह और पानी के अंदर ऑपरेशन में सक्षम होते हैं। नौसेना को दस से ज्यादा एंटी माइन शिप भी चाहिए और पांच फ्लीट सपोर्ट शिप की भी जरूरत है। नौसेना को चार लैंङ्क्षडग प्लेटफॉर्म डॉक्स की भी जरूरत है। इसकी जरूरत युद्ध के समय पड़ती है। परंपरागत पनडुब्बियों के लिए कम से कम छह सेट लिथियम आईन बैटरी की भी जरूरत है। परमाणु ऊर्जा से चलने वाले कम से कम दस विमान वाहक जहाज की भी जरूरत है। इन सबके साथ दो इंजन वाले नेवल फाइटर, नेवल मल्टी रोल हेलिकॉप्टर और मेरीटाइम यूटिलिटी हेलिकॉप्टर को भी नौसेना को देने की योजना है। आज के युद्ध में आक्रमण के साथ-साथ बचाव की भी जरूरत है। यूक्रेन के पास मजबूत डिफेंस सिस्टन नहीं होने के कारण उसे भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है। यही कारण है कि भारत ने अपने देश की सुरक्षा के लिए प्रतिरोधक क्षमताओं को मजबूत कर रहा है। अमरीकी दबाव के बावजूद भारत ने रूस से 5.5 अरब डॉलर में एस-400 के पांच स्क्वाड्रन खरीदने की डील की है। रूस ने अब तक तीन स्क्वाड्रन की आपूॢत कर दी है जबकि दो स्क्वाड्रन वर्ष 2027 तक भारत को मिल जाएगा। भारत एस-400 और खरीदने पर विचार कर रहा है। इसके अलावा स्वदेशी मिसाइल सिस्टम आकाश एवं पिनाका को भी लगातार आधुनिक बनाया जा रहा है। ऑपरेशन ङ्क्षसदूर के दौरान आकाश मिसाइल डिफेंस सिस्टम ने शानदार काम किया। भारत लगातार सामरिक क्षेत्र में देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए काम कर रहा है। अभी भारत दुनिया के 80 देशों को हथियार एवं कल-पुर्जों का निर्यात कर रहा है। अगर भारत को सुरक्षित रहना है तो उसे सामरिक क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनना ही होगा।