फारस की खाड़ी में बसा कतर आकार और आबादी के लिहाज से भले ही एक छोटा-सा देश हो, लेकिन इसकी वैश्विक महत्वाकांक्षा और प्रभाव कहीं अधिक विशाल है। लगभग 25 लाख की जनसंख्या वाला यह वंशानुगत राजतंत्र आज एक ऐसे दौर में प्रवेश कर चुका है जहां वह केवल ऊर्जा संसाधनों पर आश्रित एक खाड़ी देश नहीं, बल्कि वैश्विक सॉफ्ट पावर के रूप में उभरता दिखाई दे रहा है। कतर का इतिहास उपनिवेशवाद, क्षेत्रीय टकराव और सत्ता संघर्षों से भरपूर रहा है। पुर्तगालियों से लेकर उस्मानी साम्राज्य और फिर ब्रिटिश प्रभाव तक यह देश हमेशा बाहरी ताकतों की निगाह में रहा। लेकिन 1867 में बहरीन के साथ संघर्ष और ब्रिटेन के हस्तक्षेप ने अल-थानी परिवार को सत्ता में लाकर कतर को एक नई पहचान दी। यह मोड़ उसके आत्मनिर्णय की दिशा में पहला ठोस कदम था। 1971 में स्वतंत्रता मिलने के बाद कतर ने जिस प्रकार खुद को पुनर्गठित किया, वह एक रणनीतिक और दूरदर्शी नेतृत्व का परिचायक है। पहले मोती के व्यापार पर निर्भर रहने वाला यह देश अब गैस और तेल की वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक बड़ा खिलाड़ी है। उसके पास दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा प्राकृृतिक गैस भंडार है और इसी ने कतर को आर्थिक महाशक्ति बना दिया है। कतर का आर्थिक उत्थान केवल जीवाश्म ईंधन की बदौलत नहीं है। हाल के वर्षों में इसने ऊर्जा से आगे बढ़कर विनिर्माण, वित्त, पर्यटन और खेलों में भी निवेश किया है। आज जब वैश्विक पटल पर ग्रीन एनर्जी और जलवायु चेतना की बात हो रही है, कतर खुद को उस भविष्य के लिए तैयार कर रहा है जिसमें केवल तेल और गैस से काम नहीं चलेगा, परंतु आर्थिक शक्ति से भी अधिक उल्लेखनीय है कतर की कूटनीतिक सूझबूझ। अमरीका से लेकर तालिबान, इजराइल-हमास से लेकर रूस-यूक्रेन तक, हर बड़ी कूटनीतिक बातचीत में कतर की एक महत्वपूर्ण भूमिका रही है। वह न केवल मध्यस्थता करता है, बल्कि उसे एक तटस्थ, शांतिदूत देश के रूप में भी देखा जाता है - कुछ वैसा ही स्थान जैसा कभी स्विट्ज़रलैंड को हासिल था। कतर की सॉफ्ट पावर की सबसे उल्लेखनीय मिसाल 2022 फीफा वर्ल्ड कप की सफल मेजबानी है। इससे न केवल उसे वैश्विक मंच पर पहचान मिली, बल्कि उसने खेलों के जरिए एक समृद्ध, सक्षम और संगठित राष्ट्र की छवि पेश की। एफसी बार्सिलोना से लेकर पेरिस सेंट-जर्मेन तक, कतर का खेलों में निवेश स्पोर्ट्स डिप्लोमेसी का बेहतरीन उदाहरण है। हालांकि इसके पीछे स्पोर्ट्स वॉशिंग के आरोप भी लगे - यानी खेलों के जरिए राजनीतिक और सामाजिक आलोचनाओं को छिपाने की कोशिश। लेकिन इससे इनकार नहीं किया जा सकता कि कतर ने खेलों के जरिए अपने प्रभाव का दायरा बढ़ाया है। कतर की तरक्की की चमक के पीछे कुछ काले धब्बे भी हैं। मानवाधिकार संगठनों ने प्रवासी श्रमिकों की दशा, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लैंगिक समानता जैसे मुद्दों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। वर्ल्ड कप के निर्माण कार्यों के दौरान श्रमिकों की मौतों और अधिकार हनन को लेकर अंतर्राष्ट्रीय आलोचना भी झेलनी पड़ी। इन आलोचनाओं से कतर का नेतृत्व पूरी तरह अनभिज्ञ नहीं है। लेकिन सवाल यह है कि क्या आर्थिक सफलता और वैश्विक प्रभाव के पीछे छिपे इन सामाजिक और मानवाधिकार पहलुओं को अनदेखा किया जा सकता है? दुनिया आज केवल आर्थिक या कूटनीतिक ताकत से नहीं, बल्कि मानवीय मूल्यों से भी देशों की प्रतिष्ठा आंकती है। कतर आज एक ऐसे चौराहे पर खड़ा है जहां से उसे अपनी वैश्विक भूमिका को और मजबूती से निभाना है, लेकिन साथ ही भीतर की चुनौतियों को भी ईमानदारी से स्वीकार कर उनका समाधान निकालना है। एक तरफ वह संघर्षों में मध्यस्थ बनकर शांति की बात करता है, दूसरी तरफ अपने ही देश में विरोध के स्वरों को सीमित करता है। यदि कतर अपने आंतरिक सुधारों के साथ-साथ अपनी वैश्विक रणनीतियों को संतुलित कर सके, तो वह केवल खाड़ी क्षेत्र ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में एक आदर्श राष्ट्र बन सकता है - जहां समृद्धि, तटस्थता और मानवीय मूल्यों का समागम हो।
कतर की महत्वाकांक्षा