मोरक्को की सड़कों पर इन दिनों जो हलचल दिखाई दे रही है, वह केवल प्रदर्शन नहीं है, बल्कि यह एक नई सामाजिक और डिजिटल क्रांति की आहट है। यह क्रांति उस युवा पीढ़ी के हाथों आकार ले रही है, जिसे दुनिया जेनरेशन ज़ेड के नाम से जानती है। इस आंदोलन को नाम मिला है जेन-जी प्लस 212—यह नाम जहां एक ओर मोरक्को के अंतर्राष्ट्रीय डायलिंग कोड +212 को दर्शाता है,वहीं दूसरी ओर यह इस बात का प्रतीक है कि यह आंदोलन पूरी तरह से स्थानीय और युवा है। इस आंदोलन की शुरुआत 27 सितंबर को हुई,जब अचानक हजारों युवा सड़कों पर उतरे। किसी को अंदेशा तक नहीं था कि एक डिजिटल ग्रुप, जिसकी कोई पहचान तक सार्वजनिक नहीं, वह इतनी तेजी से पूरे देश को आंदोलित कर देगा। यह सब हुआ डिस्कॉर्ड, टिकटॉक, इंस्टाग्राम और टेलीग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए। आज जहां राजनैतिक दल और पारंपरिक संगठनों को युवाओं से जुड़ने में मुश्किल होती है, वहीं जेन-जी 212 ने बिना किसी प्रचार-प्रसार के, लाखों युवाओं को एक साथ खड़ा कर दिया। जेन-जी 212 की सबसे बड़ी विशेषता यही है कि यह पूरी तरह डिजिटल है, नेतृत्वहीन है और फिर भी बेहद संगठित है। यह समूह खुद को किसी राजनीतिक विचारधारा से जुड़ा हुआ नहीं मानता और न ही यह मोरक्को की राजशाही के खिलाफ है। इसके सदस्य यह स्पष्ट कर चुके हैं कि वे देश और अपने राजा मुहम्मद षष्ठम से प्यार करते हैं। वे केवल एक बेहतर, समान और न्यायपूर्ण समाज की मांग कर रहे हैं जहां स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सेवाएं सबके लिए उपलब्ध हों। मोरक्को की जमीनी सच्चाई ये है कि सार्वजनिक अस्पतालों की हालत बेहद दयनीय है। मरीजों को इलाज के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है, डॉक्टरों और संसाधनों की भारी कमी है और कभी-कभी तो एक बिस्तर पाने के लिए रिश्वत तक देनी पड़ती है। सरकारी स्कूलों की हालत भी अलग नहीं है—शिक्षकों की कमी, घटिया बुनियादी ढांचा और पढ़ाई का गिरता स्तर ये सभी देश के भविष्य को गहराई से प्रभावित कर रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ सरकार 2030 में होने वाले फुटबॉल वर्ल्ड कप की तैयारियों में अरबों डॉलर खर्च कर रही है। 170 करोड़ डॉलर की लागत से एक विशाल स्टेडियम का निर्माण और 900 करोड़ डॉलर से रेलवे सिस्टम का आधुनिकीकरण, ये सब विकास की मिसाल जरूर हैं, लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या यही प्राथमिकताएं होनी चाहिए,जब देश के नागरिक स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हों? प्रदर्शनकारियों ने इस मुद्दे को भी अपने नारों में शामिल किया है। उनका नारा—हेल्थ, बस स्टेडियम नहीं- इस आंदोलन की आत्मा को दर्शाता है। जेन-जी 212 यह नहीं कह रहा कि वर्ल्ड कप रद्द कर दिया जाए, बल्कि वह यह चाहता है कि जितनी तत्परता और संसाधन स्टेडियम बनाने में लगाए जा रहे हैं, उतनी ही गंभीरता से अस्पतालों और स्कूलों पर भी ध्यान दिया जाए।हालांकि कुछ स्थानों पर हिंसा भी हुई है, जिसमें संपत्ति को नुकसान पहुंचा और गोलीबारी में लोगों की जान गई। यह बेहद चिंताजनक है। जेन-जी 212 ने हिंसा से दूरी बनाकर रखी है और बार-बार अपनी शांतिपूर्ण मंशा को दोहराया है। लेकिन प्रशासन की सख्ती और शुरुआती प्रदर्शनों पर प्रतिबंध ने आंदोलन को और भी उग्र बना दिया। इस आंदोलन की तुलना 2011 के फरवरी 20 मूवमेंट से की जा रही है, जिसे मोरक्को का अरब स्प्रिंग कहा गया था। लेकिन फर्क यह है कि इस बार आंदोलनकारियों की औसत उम्र कहीं कम है। इनमें बड़ी संख्या में स्कूली छात्र और कॉलेज के युवा शामिल हैं। यह संकेत है कि आज की पीढ़ी न केवल जागरूक है, बल्कि संगठित होकर अपने हक के लिए लड़ने को भी तैयार है।यह आंदोलन सरकार के लिए एक चेतावनी है, लेकिन साथ ही एक अवसर भी। अगर सरकार सही दिशा में संवाद करती है और युवाओं की मांगों को गंभीरता से लेते हुए सुधारों की पहल करती है, तो यह आंदोलन मोरक्को के भविष्य को नई दिशा दे सकता है। वरना, यह ऊर्जा अराजकता में बदल सकती है। जेन-जी 212 सिर्फ एक विरोध नहीं है, यह एक युग परिवर्तन की शुरुआत है।