पिछले कुछ दिनों से बांग्लादेश में कट्टरपंथियों का तांडव चल रहा है। बांग्लादेश में 12 फरवरी को आम चुनाव की घोषणा होने के साथ ही कट्टरपंथियों का उत्पात बढ़ गया है। अंतरिम सरकार तथा प्रशासन कट्टरपंथियों की कठपुतली बनकर रह गई है। कट्टरपंथियों द्वारा सरेआम भारत को तोडऩे की धमकी दी जा रहा है तथा वहां के अल्पसंख्यकों पर हमले हो रहे हैं। बांग्लादेश के मेमन ङ्क्षसह जिले में ङ्क्षहदू युवक दीपू चंद दास की बेरहमी से की गई हत्या ने भारत के ङ्क्षहदू समाज को झकझोर कर रख दिया है। 23 दिसंबर को पूरे भारत में विश्व ङ्क्षहदू परिषद की अगुवाई में प्रदर्शन किया गया तथा दोषियों को कड़ी सजा देने की मांग की गई। दिल्ली में बांग्लादेशी उच्चायुक्त के सामने लोगों ने प्रदर्शन किया तथा बांग्लादेश में रहने वाले अल्पसंख्यकों खासकर ङ्क्षहदू समाज के लोगों को सुरक्षा देने की मांग की। नेपाल में भी लोगों ने बांग्लादेश में ङ्क्षहदुओं पर हो रहे हमले के विरोध में प्रदर्शन किया। त्रिपुरा में टिपरा मोथा पार्टी ने बांग्लादेश की अंतरिम सरकार की नीतियों के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। बांग्लादेश में मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार के सत्ता में आने के बाद ही वहां भारत विरोधी गतिविधियों में तेजी आ गई है। पाकिस्तानी सेना तथा गुप्तचर एजेंसी आईएसआई बांग्लादेश में भारत विरोधी भावनाओं को भडक़ाने में जुट गई है। बांग्लादेश में चीन-पाकिस्तान का गठजोड़ भारत के लिए समस्या खड़ा करने में लग गया है। भारत को भी बढ़ते खतरे को देखते हुए सतर्क रहना पड़ेगा। बांग्लादेश के कई नेता जिसमें अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार भी शामिल हैं, पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी स्थित चिकेन नेक को काटने की धमकी दे चुके हैं। कट्टरपंथी तो रोजाना भारत के खिलाफ जहर उगल रहे हैं। जमात-ए-इस्लामी का बांग्लादेश में पकड़ लगातार बढ़ता जा रहा है। बांग्लादेश की नेशनल सिटीजन पार्टी के नेता उस्मान हादी की हत्या के बाद स्थिति और बिगड़ गई है। अब तो एक दूसरे छात्र नेता मोतालेब सिकदर को भी गोली मार दी गई है। वहां की अंतरिम सरकार ने हादी की हत्या में भारत का हाथ होने का संदेह व्यक्त कर मामले को और गरम कर दिया है। लेकिन बांग्लादेश की जांच एजेंसियों की रिपोर्ट ने भारत विरोधी भावनाओं को भडक़ाने की साजिश का पर्दाफाश कर दिया है। भारत ने बिना शोर मचाये चिकेन नेक की सुरक्षा के लिए बिहार के किशनगंज, असम के बामुनीगांव तथा पश्चिम बंगाल के चोपड़ा में सैन्य बेस स्थापित कर चिकेन नेक की सुरक्षा को अभेद्य बना दिया है। मिजोरम में चौथा सैन्य बेस बनाकर भारत ने बांग्लादेश के चटगांव एवं कॉक्स बाजार को अपने निशाने पर रखा है। त्रिपुरा में सीमावर्ती क्षेत्र में अतिरिक्त जवानों को तैनात किया गया है, ताकि जरूरत पडऩे पर इस्तेमाल किया जा सके। बांग्लादेश में आजादी के वक्त ङ्क्षहदू 23 प्रतिशत थे जो अब घटकर 8 प्रतिशत के नीचे आ गये हैं। अब बांग्लादेश में भी पाकिस्तान की तरह अल्पसंख्यक समुदाय सुरक्षित नहीं है। पाकिस्तान और बांग्लादेश की सरकारें तथा प्रशासन ङ्क्षहदुओं पर हो रहे हमले पर मूकदर्शक बने रहते हंै। मानवाधिकार के मुद्दे पर जो पश्चिमी देश दूसरे देशों को उपदेश देते रहते हैं, वे बांग्लादेश में ङ्क्षहदुओं पर हो रहे हमले पर जुबान बंद रखे हुए हैं। अब समय आ गया है कि भारत अपनी वसुधैव कुटुंबकम की नीति को छोडक़र बांग्लादेश के खिलाफ सख्त कदम उठाये।
बांग्लादेश के खिलाफ प्रदर्शन