अमरीका और वेनेजुएला के बीच पिछले कई वर्षों से तनातनी चल रही थी।  डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया था। वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो तथा ट्रंप के बीच छत्तीस का आंकड़ा बना हुआ था। वेनेजुएला पर दबाव बनाने के लिए अमरीका ने इस देश को चारों तरफ से घेर रखा था। अचानक 2 जनवरी को तडक़े अमरीकी सेना ने वेनेजुएला पर हमला कर राष्ट्रपति मादुरो और उनकी पत्नी सीलिया फ्लोरेस को बंदी बना लिया। दोनों को न्यूयार्क के डिटेंशन सेटर में रखा गया है, जिसके खिलाफ अमरीकी अदालत में हथियार एवं ड्रग्स तस्करी में शामिल होने का मामला चलाया जाएगा। अमरीकी राष्ट्रपति ट्रंप पिछले कई महीनों से वेनेजुएला पर ड्रग्स तस्करी को बढ़ावा देने का आरोप लगा रहे थे। वेनेजुएला भले ही अमरीका के मुकाबले कमजोर देश हो, ङ्क्षकतु उसकी सेना ऐसी नहीं है जो इतनी जल्दी मैदान छोड़ दे। इस पूरे मामले के पीछे गद्दारों की बड़ी भूमिका मानी जा रही है। अमरीका ने जिस तरह दादागिरी करते हुए वेनेजुएला के साथ व्यवहार किया है उसे अंतर्राष्ट्रीय कानून के ताबूत में आखिरी कील माना जा रहा है। चीन, रूस, उत्तर कोरिया जैसे कई देशों ने भी अमरीका के इस कार्रवाई की कड़ी ङ्क्षनदा की है। लेकिन केवल ङ्क्षनदा करने से ही काम नहीं चलेगा। अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को इस मामले में आगे आना होगा ताकि कोई शक्तिशाली देश किसी छोटे देशों की संभ्रुता के साथ खिलवाड़ नहीं करे। चीन ने राष्ट्रपति मादुरो तथा उनकी पत्नी को जल्द रिहा करने की मांग की है, जबकि उत्तर कोरिया ने इसे अमरीका की गुंडागर्दी कहा है। भारत ने इस मामले में गहरी ङ्क्षचता व्यक्त करते हुए शांतिपूर्ण समाधान की बात कही है। भारत इस पूरे मामले में करीबी नजर बनाये हुए है। इस पूरे मामले में तेल का खेल का मुद्दा बताया जाता है। वेनेजुएला में दुनिया में सबसे ज्यादा कच्चे तेल का भंडार है। पहले अमरीकी कंपनियां वहां के तेल के संसाधनों से मुनाफा कमाती थी। 1999 में वामपंथी सरकार के सत्ता में आने के बाद तेल कुओं को राष्ट्रीयकरण कर दिया गया जिससे अमरीकी कंपनियों को वहां से हटना पड़ा। 2013 में मादुरो के सत्ता में आने के बाद भी यही दस्तूर जारी रहा। वेनेजुएला का संबंध चीन, रूस तथा ईरान के साथ प्रगाढ़ होता गया जो  अमरीका की नजर में खटकता रहा। अभी चीन का 80 प्रतिशत कच्चा तेल वेनेजुएला से आता है, जबकि अमरीका ने उस पर प्रतिबंध लगा रखा है। अमरीका उन देशों में सत्ता परिवर्तन करा देता है जो देश उनकी मर्जी के अनुसार नहीं चलते। अभी तक अमरीका 70 देशों में तख्ता पलट करवा चुका है। बांग्लादेश उसका जीता-जागता उदाहरण है। अमरीका बांग्लादेश के सेंट माॢटन द्वीप पर अपना सैन्य अड्डा बनाना चाहता था, ङ्क्षकतु शेख हसीना की सरकार ने ऐसा नहीं होने दिया। उसका परिणाम यह हुआ कि अमरीका ने शेख हसीना सरकार के खिलाफ आंदोलन चलवा कर उसे उखाड़ फेंका। श्रीलंका, नेपाल सहित और कई देश इसका शिकार हो चुके हैं। वेनेजुएला के साथ हुई घटना का अमरीका में भी विरोध हो रहा है। वहां की पूर्व उपराष्ट्रपति कमला हैरिस ने ट्रंप सरकार की इस कार्रवाई का कड़ा विरोध किया है। दुनिया के और कई देशों ने भी अमरीका के इस कार्रवाई की कड़ी ङ्क्षनदा की है। फिलहाल वेनेजुएला की उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज को कार्यवाहक राष्ट्रपति बनाया गया है। अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप वेनेजुएला के विपक्ष की नेता मारियो कोरिना मचाडो को राष्ट्रपति बनाना चाहते हैं। अमरीका मचाडो के माध्यम से वेनेजुएला के तेल भंडार पर कब्जा करना चाहता है। इस पूरे मामले में संयुक्त राष्ट्रसंघ की भूमिका काफी लचर रही है। विश्व समुदाय को मिलकर अमरीका के इस कार्रवाई का विरोध करना चाहिए। अगर अमरीका की मनमानी ऐसी ही चलती रही तो और कई देश भी इसके शिकार हो सकते हैं।