ग्रीनलैंड के मुद्दे पर अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सुर नरम पड़ गए हैं। ट्रंप पहले ग्रीनलैंड पर जबर्दस्ती कब्जा कर लेने की घोषणा कर चुके थे। उनका कहना था कि डेनमार्क या तो ग्रीनलैंड को अमरीका के हाथों बेच दे या हमला सहने के लिए तैयार रहे। ट्रंप ने अपने आधिकारिक नक्शा में वेनेजुएला, कनाडा के साथ-साथ ग्रीनलैंड को भी अमरीका का हिस्सा दिखा दिया था। ट्रंप की इस मनमानी के खिलाफ नाटो के बाकी देश एकजुट हो गए थे। यूरोप के आठ देशों फ्रांस, ब्रिटेन, डेनमार्क, जर्मनी, नार्वे, फिनलैंड, स्वीडेन तथा नीदरलैंड ने डेनमार्क के समर्थन में संयुक्त युद्धाभ्यास के लिए तैयारी कर ली थी। अमरीका ने इन यूरोपीय देशों पर 1 फरवरी से 10 प्रतिशत तथा 1 जून से 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा कर दी थी। ग्रीनलैंड के मुद्दे पर यूरोपीय देश खुलकर अमरीका के सामने खड़े हो गए थे। इन देशों का कहना था कि ग्रीनलैंड पर अमरीका द्वारा हमले की कोशिश किसी देश की संप्रभुता पर हमला है। अमरीका की मनमानी को देखकर यूरोपीय देश अपनी सुरक्षा के लिए अलग से सैन्य बल बनाने की जरूरत पर बल दे रहे थे। यूरोपीय यूनियन ने अमरीकी टैरिफ के सामने झुकने से इनकार कर दिया तथा अमरीका के साथ होने वाले व्यापक ट्रेड डील को होल्ड पर रख दिया। परिस्थिति ऐसी हो गई थी कि नाटो टूटने के कगार पर आ गया था। नाटो के टूटने से रूस और चीन जैसे देश को सीधा लाभ दिखाई दे रहा था। अमरीकी राष्ट्रपति जब स्विटजरलैंड में आयोजित दावोस शिखर सम्मेलन में पहुंचे तो सबको ऐसी उम्मीद थी कि वे ग्रीनलैंड पर कोई बड़ी घोषणा करेंगे। लेकिन ट्रंप ने अपने संबोधन में कहा कि अमरीका का ग्रीनलैंड पर जबर्दस्ती अधिकार करने का कोई इरादा नहीं है। अमरीका नाटो के साथ मिलकर ग्रीनलैंड की सुरक्षा के लिए कारगर कदम उठायेगा। नाटो के बाकी देश भी अमरीका को ऐसा ही सुझाव दे रहे थे। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि अमरीका ग्रीनलैंड को अपने पाले में करने के लिए कूटनीतिक प्रयास जारी रखेगा। ऐसा लगता है कि यूरोप के 27 देशों के साथ होने वाले व्यापार समझौते को टूटता देख अमरीका नरम रुख अपनाने पर मजबूर हुआ है। मालूम हो कि अमरीका और यूरोपीय देशों के बीच 350 बिलियन डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार होता है। अमरीकी कंपनियां इसे बर्दाश्त करने को तैयार नहीं थी। किसी देश की संप्रभुता पर हमला करना संयुक्त राष्ट्र संघ के सिद्धांतों के खिलाफ है। अमरीका ने वेनेजुएला में जिस तरह की कार्रवाई की है उससे उसका साहस बढ़ा हुआ है। दावोस की बैठक में अमरीकी राष्ट्रपति ने जो कहा उससे आशा की नई किरण निकली है, ङ्क्षकतु अमरीकी राष्ट्रपति के बयान पर विश्वास नहीं किया जा सकता, क्योंकि वे कब पलटी मारेंगे, उसकी कोई गारंटी नहीं है। ग्रीनलैंड अमरीका के लिए रणनीतिक महत्व का क्षेत्र है, क्योंकि दुनिया का ज्यादा व्यापार ग्रीनलैंड से होकर होता है। दुनिया के व्यापारिक जहाज ग्रीनलैंड से होकर गुजरते हैं। डेनमार्क के कड़े रुख के बाद यूरोपीय देशों से मिले सहयोग ने अमरीका को फिलहाल अपना पैर पीछे खींचने पर मजबूर किया है।
नरम पड़े डोनाल्ड ट्रंप