गुवाहाटी : गौहाटी उच्च न्यायालय ने सोमवार को राज्य सरकार से पिछले साल मई से शुरू गुई मुठभेड़ों में हुई मौतों के मामले में मानवाधिकारों के उल्लंघन के आरोपों पर जवाब मांगा। उच्च न्यायालय ने असम के महाधिवक्ता(एजी)को इस मुद्दे से अवगत कराने को कहा है। उच्च न्यायालय, दिल्ली के अधिवक्ता आरिफ मोहम्मद यासीन जवादर और असम के निवासी की ओर से दायर एक जनहित याचिका (पीआईएल)पर सुनवाई कर रहा था। असम म मुठभेड़ में हुई कथित हत्याओं की उच्च न्यायालय की निगरानी में एक स्वतंत्र जांच की मांग करते हुए उच्च न्यायालय ने मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार से प्रतिक्रिया के लिए मामले की अगली सुनवाई 11 जनवरी को निर्धारित की है। वरिष्ठ अधिवक्ता और भारत के पूर्व अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल इंदिरा जयसिंह, जो याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुईं राज्य में कथित फर्जी मुठभेड़ों की स्वतंत्र जांच की मांग करती है। याचिकाकर्ता ने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 302 के तहत अपराधियों की हत्याओं में प्राथमिकी दर्ज करने के निर्देश में अदालत के हस्तक्षेप की भी मांग की। जनहित याचिका में मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम,1993 की धारा 30 के तहत राज्य में मानवाधिकार न्यायालयों के गठन के लिए भी प्रार्थना की गई। जवादार ने मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए अदालत को सूचित किया कि मई में नई सरकार के कार्यभार संभालने के बाद से इस तरह के 80 से अधिक मुठभेड़ हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि समय सीमा के दौरान फर्जी मुठभेड़ों में 28 लोग मारे गए और 48 घायल हो गए। उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने भी सितंबर में राज्य पुलिस से कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी थी।
गौहाटी उच्च न्यायालय ने एनकाउंटर पर असम सरकार से मांगा जवाब