गुवाहाटी : गौहाटी उच्च न्यायालय ने असम सरकार से कहा कि वह मई 2021 में राज्य में भाजपा की सत्ता में वापसी के बाद से हो रही पुलिस मुठभेड़ों पर एक विस्तृत हलफनामा दाखिल करे। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया और न्यायमूर्ति सौमित्र सैकिया की खंडपीठ ने अधिवक्ता आरिफ मोहम्मद यासीन जवादर की ओर से दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए असम के महाधिवक्ता देवजीत लोन सैकिया से मुठभेड़ों से संबंधित विस्तृत हलफनामा दायर करने को कहा। महाधिवक्ता ने भाषा को बताया कि गृह एवं राजनीतिक विभाग हलफनामा तैयार करेगा और दाखिल करेगा। उच्च न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 25 जनवरी की तारीख निर्धारित की है।जवादर के अनुसार, अदालत ने प्रमुख सचिव (गृह) या अतिरिक्त सचिव (गृह) को कथित फर्जी मुठभेड़ों पर विस्तृत हलफनामा दाखिल करने को कहा। मानवाधिकार कार्यकर्ता एवं वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने याचिकाकर्ता का प्रतिनिधित्व किया। जवादर ने दावा किया कि महाधिवक्ता सैकिया ने अदालत को सूचित किया कि मुठभेड़ों की मजिस्ट्रेट से जांच कराई जा रही है, लेकिन जयसिंह ने इसका विरोध करते हुए कहा कि ऐसी कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है। जयसिंह ने अदालत से आग्रह किया कि यदि मामले दर्ज किए गए हैं तो राज्य सरकार को अपनी वेबसाइट पर प्राथमिकी अपलोड करने का निर्देश दिया जाए। इससे पहले, तीन जनवरी को गौहाटी उच्च न्यायालय ने असम सरकार से मुठभेड़ों के सभी मामलों का विवरण प्रस्तुत करने को कहा था।याचिका में असम सरकार के अलावा, असम पुलिस के महानिदेशक, राज्य के कानून और न्याय विभाग, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और असम मानवाधिकार आयोग को प्रतिवादी बनाया गया है।जवादर ने जनहित याचिका में दावा किया है कि मई 2021 में जब से मुख्यमंत्री हिमंत विश्वशर्मा ने कार्यभार संभाला है, तब से लेकर अभी तक असम पुलिस और कथित आरोपियों के बीच 80 से अधिक फर्जी मुठभेड़ हुई हैं, जिनमें 28 लोगों की मौत हुई और 48 से अधिक घायल हुए हैं।
गौहाटी हाईकोर्ट ने असम सरकार से पुलिस मुठभेड़ों पर विस्तृत हलफनामा दाखिल करने को कहा