ओमप्रकाश गट्टाणी-

भारत के सुदूर पश्चिम में स्थित तत्कालीन राजपुताना से आकर असम में बसे मशहूर अगरवाला परिवार के लोगों ने असम की भाषा-संस्कृृति के विकास की दिशा में अतुलनीय योगदान दिया। इस परिवार के लोगों ने असम व असमिया जाति को ही अपना सर्वस्व मानकर हर कार्य किया। असम के प्रति असीम प्रेम के कारण अगरवाला परिवार ने एक विशिष्ट असमिया परिवार के रूप में प्रतिष्ठित होने का गौरव प्राप्त किया है। यह अपने आप में एक अनूठा उदाहरण है। ज्योतिप्रसाद अगरवाला का जन्म इसी परिवार में हुआ था। अगरवाला परिवार आर्थिक व सांस्कृृतिक रूप से काफी समृद्ध था। यहां तक कहा जाता है कि इस परिवार पर लक्ष्मी और सरस्वती दोनों की ही कृृपा रही है। ज्योतिप्रसाद ने संस्कृृति से जुड़े हर पहलू पर अपने विचार स्पष्ट व प्रभावशाली ढंग से व्यक्त किए। ज्योतिप्रसाद की नजरों में संस्कृृति व अर्थनीति के बीच भी गहरा संबंध है। उनका स्पष्ट मानना था कि अगर अर्थनीति अस्थिर होती है तो इसका प्रभाव संस्कृृति पर भी पड़ना स्वाभाविक है। सन् 1949 में डिब्रूगढ़ में आयोजित अखिल असम शिक्षा सन्मिलन के महत्वपूर्ण अध्यक्षीय संबोधन किया। ज्योतिप्रसाद की धारणा से हम समझ सकते हैं कि हमारे हर कार्य में संस्कृृति संस्कारों के पुट का होना आवश्यक है। ऐसा नहीं होने पर हमारे कार्य कोरे कार्य ही बनकर रह जाएंगे, न उनसे समाज का कल्याण होगा न देश का और न हमारा भला ही हो पाएगा। वह कार्य फिर राजनीति हो, व्यापार हो, पेशा हो अथवा शिक्षण अध्ययन ही क्यों न हो। कुल मिलाकर हम जिंदगी के किसी भी क्षेत्र में कार्य कर रहे हों, हमें हमारी सोच में संस्कृृति के उपादान को हमेशा जोड़े रखना है। ज्योतिप्रसाद ने ‘शिल्पीर पृथिवी’ शीर्षक लेख में कहा है कि जिस अर्थनीति के द्वारा जनता को संस्कृृति गढ़ने की सुविधा नहीं मिलती- वह अर्थनीति अनुपयोगी है। वह सांस्कृृतिक अर्थनीति नहीं है व वह दुष्कृृतिमूलक अर्थनीति है। साम्राज्यवाद और जो पश्चिमी धनतंत्रवाद की अर्थनीति है वह दिखने में ही दुष्कृृतिमूलक है। ये दो अर्थनीतियां निश्चय ही हमारे शिल्पियों की नहीं है। आज दुनिया की सभी नीतियों को ही सांस्कृृतिक होना पड़ेगा। सांस्कृृतिक राष्ट्रनीति, सांस्कृृतिक अर्थनीति, सांस्कृृतिक समाजनीति, सांस्कृृतिक रणनीति, सांस्कृृतिक शिल्पनीति व वाणिज्य भी, अगर सूक्ष्मता से देखें और उसे सांस्कृृतिक परिधि के अंदर लिया जा सके तो वाणिज्य नीति को भी सांस्कृृतिक होना पड़ेगा।