नई दिल्लीः आयकर अधिनियम 1961 के मुताबिक, जिन व्यक्तियों पर टैक्स देनदारी बनती है और वे तय समयसीमा में आयकर जमा नहीं करते हैं तो उनको तीन से सात साल तक जेल की सजा भुगतनी पड़ सकती है। अधिनियम के मुताबिक, सभी करदाताओं को तय समय-सीमा के भीतर आयकर रिटर्न दाखिल करना जरूरी है। कर एवं निवेश विशेषज्ञ बलवंत जैन के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति अंतिम तारीख तक आयकर रिटर्न (आईटीआई) दाखिल नहीं करता है तो आयकर विभाग उनसे वास्तविक आय पर 50 से 200 फीसदी तक पेनाल्टी वसूल सकता है। साथ ही ऐसे करदाताओं से आईटीआर दाखिल करने तक का टैक्स और ब्याज भी लिया जाएगा। बलवंत के मुताबिक, केंद्र सरकार के पास टैक्स की देनदारी के बावजूद अंतिम तिथि तक आईटीआर दाखिल न करने वालों के खिलाफ मुकदमा चलाने का अधिकार है। जैन बताते हैं कि ऐसा जरूरी नहीं है कि हर बार आईटीआर दाखिल ना करने पर आयकर विभाग करदाता के खिलाफ मुकदमा चलाएगा। उनके मुताबिक, 10 हजार रुपए से ज्यादा की टैक्स देनदारी पर आयकर विभाग करदाता के खिलाफ मुकदमा चला सकता है। आयकर कानूनों के मुताबिक, ऐसे मामलों में कम से कम तीन साल और अधिकतम सात साल तक की सजा का प्रावधान है। असेसमेंट ईयर 2021-22 के लिए आईटीआर दाखिल करने की अंतिम तारीख 31 मार्च 2022 है। जो व्यक्तिगत करदाता 31 दिसंबर 2021 को आईटीआर फाइल करने से चूक गए हैं वे 31 मार्च 2022 तक आईटीआर फाइल कर सकते हैं। हालांकि, अंतिम तिथि के बाद भी जुर्माने के साथ आईटीआर फाइल किया जा सकता है।