गुवाहाटी : मेघालय उच्च न्यायालय, शिलांग ने बीते 9 फरवरी को मेघा टेक्निकल एंड इंजीनियर्स प्रा. लिमिटेड बनाम मेघालय राज्य और अन्य तथा स्टार सीमेंट लिमिटेड बनाम मेघालय राज्य और अन्य दोनों मामलों के संदर्भ में सुनवाई करते हुए मेघालय सरकार की ओर से सीमेंट पर लगाए गए उपकर को अवैध करार दिया। साथ ही जो कर वसूले गए हैं उसे वापस करने का आदेश दिया। माननीय न्यायमूर्ति संजीव बनर्जी, मुख्य न्यायाधीश और न्यायमूर्ति डब्ल्यू डिएंगदोह, न्यायाधीश ने मामले की सुनवाई करते हुए सरकार को आदेश दिया कि सीमेंट पर उपकर के रूप में वसूली गई रकम के 30 प्रतिशत भाग कैंसर प्रतिष्ठानों को दिया जाए। उल्लेखनीय है कि मेघा टेक्निकल एंड इंजीनियर्स प्रा. लिमिटेड तथा स्टार सीमेंट लिमिटेड की ओर से 2016 के डब्ल्यूपी (सी) संख्या 280 और 281, इन दो रिट याचिकाओं में सरकार को मेघालय सीमेंट उपकर अधिनियम, 2010 की वैधता को चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ताओं के अनुसार मेघालय राज्य की ओर से मेघालय सीमेंट उपकर अधिनियम, 2010 (2011 का अधिनियम संख्या 5) की ओर से लगाए गए उपकर पूरी तरह से अवैध था और याचिकाकर्ताओं और सीमेंट उद्योग से जुड़े अन्य लोगों के प्रतिकूल था। याचिकाकर्ताओं की तरफ से डॉ. अशोक सराफ, वरिष्ठ अधिवक्ता और प्रतिवादी की तरफ से महाधिवक्ता ए. कुमार ने एच खरमीह, जीए के साथ मामले की सुनवाई में भाग लिए थे। हाइकोर्ट ने फैसला सुनाया कि राज्य को सीमेंट के निर्माण या उत्पादन पर कोई कर या उपकर लगाने का कोई अधिकार नहीं है। फैसले में कहा गया कि 2010 के आक्षेपित अधिनियम के तहत एकत्र उपकर के कारण कुल वसूली का 30 प्रतिशत जनता की परियोजना के लिए निर्धारित की गई है। सरकार को निर्देश दिया गया कि एकत्र उपकर के निर्धारित और संकेतित राशि का 30 प्रतिशत शिलांग के सरकारी सामान्य अस्पताल में स्थापित अतिरिक्त कैंसर विंग में उन्नत चिकित्सा उपकरण खरीदने के लिए उपयोग किया जाए। इसके अलावा याचिकाकर्ताओं से इस राशि का 20 प्रतिशत वापस किया जाए। याचिकाकर्ताओं को वापसी के निर्देश की तारीख से चार महीने के भीतर किया जाना चाहिए। ऐसा नहीं करने पर राशि पर चूक की तारीख से भुगतान की तारीख तक 6 प्रतिशत प्रति वर्ष की साधारण दर से ब्याज लगेगा। उपकर के रूप में एकत्र राशि का शेष 50 प्रतिशत जनता की परियोजना के लिए सरकार के कोष में जमा की जाएगी।
मेघालय सरकार को सीमेंट कंपनियों से कर या उपकर वसूलने का अधिकार नहीं : हाईकोर्ट