गुवाहाटी : मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्व शर्मा ने वृहस्पतिवार को सूचित किया कि असम के करीब 100 छात्र यूक्रेन के संकट में फंस गए हैं। उनमें से कई यूक्रेन में मेडिकल की पढ़ाई कर रहे थे। यूक्रेन-रूस संघर्ष के दौरान असम के छात्रों सहित भारत के अनेक छात्र वहां फंसे हुए हैं। हालांकि भारत सरकार ने भारतीय नागरिकों को मुख्य रूप से छात्रों को निकालने का प्रयास किया, लेकिन निर्धारित विशेष उड़ान वृहस्पतिवार को रद्द कर दी गई क्योंकि यूक्रेन सरकार ने अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया था। मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि  हम यूक्रेन में रहने वाले छात्रों के संपर्क में हैं। हमने विदेश मंत्रालय (एमईए) के साथ संपर्क बनाए रखा है और उनसे असम के सभी लोगों के लिए अत्यधिक सुरक्षा के लिए व्यवस्था करने को भी कहा। जानकारी के मुताबिक जब भी दूतावास भारतीय नागरिकों को एयरलिफ्ट करने का फैसला करेगा,असम के छात्रों को भी उठा लिया जाएगा। युद्धकालीन स्थिति के बीच यूक्रेनी हवाई क्षेत्र के बंद होने के साथ ही विदेश मंत्रालय वैकल्पिक आकस्मिक योजनाओं को लागू करने के लिए उच्च स्तरीय बैठकों की एक श्रृंखला आयोजित कर रहा है। कीएव स्थित भारतीय दूतावास ने अधिकारियों से संपर्क करने के लिए भारतीय नागरिकों के लिए हेल्पलाइन नंबर भी खोले हैं। अनुमान किया गया है कि वर्तमान में 15,000 से अधिक भारतीय नागरिक यू्क्रेन में फंसे हुए हैं। उल्लेखनीय है कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की ओर से यूक्रेन में एक सैन्य अभियान की घोषणा के बाद यूक्रेन में स्थिति बिगड़ गई, जिससे दोनों देशों के बीच पूर्ण पैमाने पर सैन्य टकराव की संभावना पर गंभीर चिंताएं पैदा हो गईं। दूसरी ओर यूक्रेन में युद्ध शुरू होने से पहले ही असम के कुछ विद्यार्थी वहां से लौटने में कामयाब हो चुके हैं। उल्लेखनीय है कि मुख्य रूप से चिकि त्सा शिक्षा के अध्ययन के लिए यूक्रेन गए असम के करीब दो सौ विद्यार्थी वहां फंसे हुए हैं। परंतु युद्ध शुरू होने से पहले ही पिछले दो दिनों में कुछ विद्यार्थी घर लौटने में कामयाब हो चुके हैं, इनमें गुवाहाटी भेटापाड़ा के हार्बी दत्ता, हेंगराबाड़ी के चिंरंजीव डेका, मोरीगांव की डेइजी मेधी, हातीगांव शेवाली पथ के स्नेह अध्यापक व शबीर शाह, नगांव  की गौसिया शबनम शामिल हैं। ये सभी यूक्रेन में टानोपिल नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी और खारकिव नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी के विद्यार्थी थे। इसके अलावा नुमलीगढ़ शोधनागार शहर के दो विद्यार्थी नूर नाओसिंह रहमान तथा मेघना दास भी युद्ध शुरू होने से पहले ही सकुशल घर लौट आए हैं, परंतु उनके साथी पूजा बरदलै यूक्रेन में ही फंसी हुई हैं। अन्य एक विद्यार्थी तेजपुर के प्रतीक्षा गोगोई भी घर लौटने में नाकाम रहीं। प्रतीक्षा ने 4 मार्च को घर लौटने के लिए अधिक कीमत में विमान का टिकट भी करा लिया था, परंतु युद्ध शुरू हो जाने के कारण हवाई अड्डा बंद कर दिया गया और वह वहीं फंसी रह गई। गुवाहाटी के नूनमाटी निवासी अशोक सिंह नामक एक विद्यार्थी घर लौटने  वाले थे कि विमान सेवा पर प्रतिबंध लगा दिया गया। अशोक ने कहा कि युद्ध शुरू होने के बाद अब यूक्रेन की राजधानी किएव सहित खारकिव, उदेस्सा आदि शहरों में गोलीबारी की आवाजें सुनाई दे रही है। विस्फोट के कारण निकले काला धुआं आसमान में फैल रहा है। सरकार ने नागरिकों को घर से बाहर निकलने से मना किया है। शहर के सड़क जनशून्य हो चुका है। इसके साथ ही आज सुबह से पेयजल की कीमत काफी बढ़ गई है।