नई दिल्ली/लखनऊ : पांच राज्यों के गुरुवार (10 मार्च) को आए नतीजे आने वाले समय में भारतीय राजनीति की दशा और दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। भाजपा ने जहां चार राज्यों में अपनी सत्ता बरकरार रखी, वहीं पंजाब में आम आदमी पार्टी ने सभी राजनीतिक दलों पर झाड़ू फेर दी। वैसे ये चुनाव पार्टियों से ज्यादा चेहरों की वजह से चर्चा में रहे। पंजाब, उत्तराखंड में मौजूदा सीएम ही चुनाव हार गए। पंजाब में भी कई बड़े नेताओं को हार का सामना करना पड़ा तो योगी आदित्यनाथ भाजपा को उत्तर प्रदेश में लगातार दूसरी बार जीत दिलाने में कामयाब रहे। भाजपा पांच में से चार राज्यों में जीती। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में उसकी सीटें घटीं, लेकिन मणिपुर और गोवा में उसे फायदा हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी एक रैली में जो नारा दिया था, वह सही साबित हुआ। उत्तर प्रदेश में योगी भाजपा के लिए उपयोगी साबित हुए। पंजाब के नतीजे चौंकाने वाले रहे। यहां आम आदमी पार्टी की लहर में कांग्रेस को काफी नुकसान हुआ। अकाली दल ने भी सीटें गंवाईं। उत्तराखंड में भाजपा फिर सरकार बनाने जा रही है। हालांकि, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी खुद चुनाव हार गए। गोवा में भी भाजपा बहुमत से एक सीट दूर रह गई। अब उसे सरकार बनाने के लिए समर्थन की जरूरत है। मणिपुर में भाजपा ने कमाल किया और पहली बार स्पष्ट बहुमत को पार करती दिख रही है। मोदी और योगी ने उत्तर प्रदेश में वो कर दिखाया, जो 37 साल में कोई पार्टी नहीं कर सकी.. लगातार दूसरी बार सत्ता में भाजपा की वापसी। सवा दो सौ से ज्यादा सीटें जीत चुकी भाजपा बहुमत से काफी आगे निकल चुकी है। सपा सवा सौ में सिमट गई है। कांग्रेस और बसपा साफ ही हो गई है। पूरा यूपी नापने वाली प्रियंका गांधी की पुरजोर मेहनत के बावजूद सीट खाली दो आईं। मायावती इससे भी आधे यानी एक सीट ही हासिल कर पाएंगी। भाजपा की जीत ऐतिहासिक थी तो जश्न भी उसी अंदाज में मना। शाम करीब साढ़े पांच बजे योगी लखनऊ पार्टी दफ्तर पहुंचे। गुलाल उड़ाकर होली खेली और बोले कि जब मोदी जैसा नेतृत्व हो तो ऐसा ही बहुमत मिलता है। जश्न लखनऊ से दिल्ली तक मनाया गया। प्रधानमंत्री मोदी जब शाम साढ़े सात बजे भाजपा मुख्यालय पहुंचे तो फूल बरसाए गए। माला पहनाई गई। वहीं दूसरी ओर भाजपा भले दूसरी बार जीती, लेकिन परफॉर्मेंस पिछली बार के मुकाबले गिर गई। 2017 में 312 सीटें मिलीं थी तो इस बार पार्टी 275 तक पहुंच पा रही है। सपा भले ही सत्ता में नहीं आई, लेकिन 75 से ज्यादा सीटों का फायदा उसे हो रहा है। भाजपा के डिप्टी सीएम केशव मौर्य और बेसिक शिक्षा मंत्री सतीश द्विवेदी जैसे धुरंधर भी हार गए। उत्तर प्रदेश में ऐतिहासिक बहुमत के बाद योगी आदित्यनाथ भारी हुजूम के बीच लखनऊ दफ्तर पहुंचे। करीब पौने छह बजे वे मंच पर पहुंचे और साथी मंत्रियों-पदाधिकारियों के साथ गले मिले और जमकर गुलाल उड़ाया। विजयी भाषण भी दिया। बोले- जब मोदी जी जैसा नेतृत्व हो तो ऐसा ही प्रचंड बहुमत मिलता है। विजयी उल्लास से शुरू हुआ ये 30 मिनट का कार्यक्रम जय श्री राम के नारों के साथ खत्म हुआ। लखनऊ में 10 मिनट के संक्षिप्त भाषण में योगी बोले- भाजपा ने चार राज्यों में चुनाव जीते हैं। उत्तर प्रदेश पर विशेष रूप से देश और दुनिया की निगाहें थीं। जब मोदी जी कोरोना और भ्रष्टाचार से लड़ रहे थे, तब कुछ लोग भ्रामक प्रचार कर रहे थे। मतगणना के बारे में भ्रामक बातें कही जा रही थीं। उत्तर प्रदेश की जनता ने उस प्रचार को झुठलाते हुए भाजपा को बहुमत दिया है। जनता का आभार। ये बहुमत राष्ट्रवाद, सुरक्षा, विकास और सुशासन के मॉडल को जनता का आशीर्वाद है। चुनाव से पहले अखिलेश का हाथ थामने वाले स्वामी प्रसाद मौर्य फाजिलनगर में हार गए। टेट पेपर लीक में घिरे योगी के मंत्री सतीश द्विवेदी सिद्धार्थनगर की इटवा सीट नहीं जीत पाए। कैराना में भी भाजपा को हार मिली, यहां सपा के नाहिद हसन जीते। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय सिंह लल्लू को कुशीनगर में हार मिली। 37 साल से यूपी में किसी पार्टी की लगातार दूसरी बार सरकार नहीं बनी। 1985 में कांग्रेस लगातार दूसरी बार यहां चुनाव जीती थी। इस सरकार का टर्म पूरा होने के अगले करीब 19 सालों तक राज्य में हंग असेंबली रही। 2007 से हर 5 साल बाद सरकार बदली है। पहले मायावती फिर अखिलेश और फिर योगी सीएम बने। इस बार फिर भाजपा सरकार बनाने जा रही है। उत्तर प्रदेश में 37 साल में पहली बार ऐसा होगा। देश में कर्नाटक, उत्तराखंड, हिमाचल और राजस्थान में भी लंबे अरसे से हर बार सरकार बदलने का ट्रेंड है।
यूपी में फिर चला मोदी-योगी का जादू