पूर्वांचल प्रहरी डेस्क संवाददाता
गुवाहाटी : रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण भारत में अखबारी कागज का संकट बढ़ रहा है क्योंकि भारत की 60 प्रतिशत से अधिक अखबारी कागज की जरूरतें रूस से आयात करके पूरी की जाती हैं। इसके अलावा पिछले कुछ वर्षों में कोविड महामारी के कारण कच्चे माल की कमी ने भी संकट को और बढ़ा दिया है और कागज की कीमत असामान्य रूप से बढ़ गई है। आयातित अखबारी कागज की कीमत, जो पिछले साल मार्च में 63 रुपए प्रति किलो थी, अब बढ़कर 80 रुपए प्रति किलो हो गई है और अगर यही स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो कीमत में और बढ़ोत्तरी हो सकती है। देश में उत्पादित अखबारी कागज की कीमत में भी तेजी से वृद्धि हुई है। जहां बी ग्रेड पेपर की कीमत पिछले साल मार्च में 58 रुपए प्रति किलो थी वहीं अब यह बढ़कर 77 रुपए प्रति किलो हो गई है। सी ग्रेड पेपर की कीमत 51 रुपए प्रति किलो से बढ़कर 74 रुपए प्रति किलो हो गई। इसके अलावा कागज की भारी कमी के अन्य कारण भी है। उल्लेखनीय है कि पेपर मिलों के पास पर्याप्त कच्चा माल नहीं है। कुछ मिलें अब 20 से 30 प्रतिशत क्षमता पर चल रही हैं और कुछ मिलें पहले ही बंद हो चुकी हैं। वर्तमान स्थिति के संदर्भ में कुछ प्रमुख न्यूजप्रिंट डीलरों ने कहा कि रूस-यूक्रेन का युद्ध वर्तमान स्थिति के प्रमुख कारणों में से एक है। न्यूज प्रिंट का लगभग 60 प्रतिशत रूस से आयात किया जाता है लेकिन युद्ध के कारण अब भारत रूस से अखबारी कागज आयात करने की स्थिति में नहीं है। डीलरों ने यह भी बताया कि ज्यादातर कार्गो हैंडलिंग कंपनियां,जो रूस से कागज लाती थीं, अमरीका और यूरोप से हैं, लेकिन लगाए गए प्रतिबंधों के कारण वे इस समय रूस से उत्पाद नहीं उठा रही हैं। बैंक भी रूस को पैसा भेजने के इच्छुक नहीं हैं। हालांकि कनाडा सहित अन्य देशों से भी अखबारी कागज की आयात होती है परंतु भारत में मांग को पूरा करने के लिए यह बिल्कुल भी पर्याप्त नहीं है। लेकिन डीलरों को उम्मीद है कि यह संकट जल्द ही या कुछ देर बाद में खत्म हो ही जाएगा। एक डीलरों ने कहा कि दुनिया रूस को स्थायी रूप से अलग नहीं कर सकती है। यदि ऐसा किया जाता है तो यूरोपीय देशों को गंभीर ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ेगा। इसलिए हमें लगता है कि युद्ध खत्म होने के बाद जल्द ही इस मुद्दे को सुलझा लिया जाएगा। एक अन्य डीलर ने कहा कि भारतीय पेपर मिलों का संकट जल्दी ही टल जाने की संभावना है। कोविड के प्रकोप के कारण भारतीय मिलों को कच्चे माल के गंभीर संकट का सामना करना पड़ा। पुनर्नवीनीकरण कागज पेपर मिलों का मुख्य कच्चा माल है और भारत पुनर्नवीनीकरण कागज का भी आयात करता है, लेकिन महामारी के दौरान ज्यादातर देशों में अखबारों की बिक्री कम हो गई है। छात्र ऑनलाइन पढ़ाई कर रहे हैं और वे शायद ही किताबों और कापियों का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन अब स्थिति में सुधार हुआ है। अखबार पढ़ने की आदत बढ़ रही है और छात्रों ने भी स्कूलों में जाना शुरू कर दिया है। इसलिए पुनर्नवीनीकरण कागज की कमी कुछ महीनों में कम हो जानी चाहिए।