पूर्वांचल प्रहरी डेस्क संवाददाता

गुवाहाटी : केंद्रीय गृहमंत्री तथा सरकारी भाषा संबंधी संसदीय समिति के अध्यक्ष अमित शाह ने वृहस्पतिवार को घोषणा की कि असम सहित पूर्वोत्तर के 8 राज्यों में दसवीं कक्षा तक हिंदी भाषा एक अनिवार्य विषय के रूप में पढ़ाई जाएगी। उन्होंने अपनी घोषणा में उल्लेख किया कि पूर्वोत्तर के आठ राज्यों में अब से प्रत्येक स्कूलों में और प्रत्येक विद्यार्थी को दसवीं कक्षा तक हिंदी भाषा अनिवार्य विषय के रूप में पढ़ाई जाएगी। इस उद्देश्य से 22 हजार  हिंदी शिक्षकों को नियुक्ति देकर पूर्वोत्तर के आठों राज्यों में भेजे जाएंगे। अमित शाह ने यह भी कहा कि देश की एकता के लिए सबको अब हिंदी सीखना जरूरी हो गई है। देश के सभी प्रांतों में अब हिन्दी अपरिहार्य विषय के रूप में मान लिया गया है। इसलिए पूर्वोत्तर के आठों राज्यों में दसवीं कक्षा तक हिंदी अनिवार्य विषय के रूप में पढ़ाने का फैसला लिया गया है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि पूर्वोत्तर के 9 जनजाति को उनकी मौखिक भाषाओं के लिए देवनागरी लिपि ग्रहण करना होगा। उल्लेखनीय है कि सरकारी भाषा संबंधी संसदीय समिति के अध्यक्ष अमित शाह की अध्यक्षता में वृहस्पतिवार को आयोजित समिति की बैठक में यह फैसला किया गया। बैठक के बाद उन्होंने टिप्पणी की कि पूरे देश में हिंदी भाषा का महत्व स्थापित होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस मुद्दे पर अधिक महत्व दे रहे हैं। केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने स्पष्ट रूप से कहा कि भारतीय नागरिकों को अंग्रेजी के विकल्प के रूप में हिन्दी भाषा को ग्रहण कर लेना चाहिए। हिंदी कोई स्थानीय भाषा नहीं है, यह भारत की राष्ट्र भाषा है। नरेंद्र मोदी सरकार अब कैबिनेट के 70 प्रतिशत कामकाज हिंदी में संपन्न करती है। उन्होंने यह भी कहा कि देश के एक राज्य के निवासियों को हिंदी भाषा का उपयोग करना चाहिए। इस कार्य के जरिए देश के नागरिकों में एकता की भावना बढ़ेगी। हालांकि अमित शाह की इस टिप्पणी के खिलाफ दक्षिण भारत में तीव्र प्रतिक्रिया हुई है। कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल सहित दक्षिण भारत के कई राज्यों में राजनीतिक तथा विपक्ष दलों के नेताओं ने अमित शाह की इस टिप्पणी का विरोध किया है।