नई दिल्ली:  उत्तर-पश्चिम दिल्ली में शोभायात्रा के दौरान हिंसा के कुछ दिनों बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के शासन वाले उत्तरी दिल्ली नगर निगम (एनडीएमसी) के अतिक्रमण विरोधी अभियान के तहत जहांगीरपुरी में बुधवार को बुलडोजर के जरिए एक मस्जिद के पास कई ढांचों को तोड़ दिया गया। तोडफ़ोड़ के खिलाफ जमीयत उलमा-ए-हिंद द्वारा दायर एक याचिका पर संज्ञान लेने के बाद उच्चतम न्यायालय को अभियान को रुकवाने के लिए दो बार हस्तक्षेप करना पड़ा।एनडीएमसी द्वारा अतिक्रमणकारियों के खिलाफ अभियान शुरू करने के साथ ही इस इलाके में दंगा रोधी टुकडय़िों सहित सैकड़ों पुलिसकर्मी तैनात थे। दो घंटे से भी कम समय में, कई दुकानों और अवैध ढांचों को गिरा दिया गया। कुछ दुकान के मालिकों ने यह भी कहा कि  उनके प्रतिष्ठानों को दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) और स्थानीय नगर निगम की मंजूरी मिली हुई थी।इस अभियान पर राजनीतिक घमासान भी शुरू हो गया। कांग्रेस नेता राहुध गांधी ने सरकार पर निशाना साधा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आग्रह किया कि ‘नफरत के बुलडोजर’ को रोका जाए और ऊर्जा संयंत्रों को शुरू किया जाए।एनडीएमसी की कार्रवाई रुकवाने के लिए अदालत का आदेश लेकर वहां पहुंचने वालीं मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की नेता वृंदा करात ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा, ‘‘न्यायालय ने सुबह 10:45 बजे यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया। हमारे वकील कपिल सिब्बल और दुष्यंत दवे ने अदालत के सामने याचिका का जिक्र किया। मैं इस तोडफ़ोड़ को रोकने आयी हूं...अधिकारियों को न्यायालय के आदेश की धज्जियां उड़ाने से रोकने आई हूं।’’ बुलडोजर से कई दुकानों और सडक़ के किनारे बनी गुमटियों को गिराए जाने से परेशान कुछ महिलाएं सडक़ पर बैठी रो रही थीं। सडक़ों पर कंक्रीट और ईंट का ढेर पड़ा हुआ था, लेकिन कोई हिंसक विरोध नहीं हुआ। दुकान मालिकों, जिनके प्रतिष्ठान ध्वस्त कर दिए गए थे, ने दावा किया कि एनडीएमसी ने उन्हें पूर्व सूचना दिए बिना अतिक्रमण अभियान शुरू किया।  मोहम्मद रहमान, जिनकी दुकान ढहा दी गई ने कहा कि यदि आप (अधिकारी) दंडित करना चाहते हैं, तो गिरफ्तार किए गए आरोपियों को दंडित करें। आप पूरे समुदाय को दंडित क्यों कर रहे हैं? लोगों ने अपनी रोजी रोटी गंवा दी है।’’ जूस की दुकान चलाने वाले गणेश गुप्ता ने दावा किया कि डीडीए ने 1977 में उन्हें दुकान आवंटित की थी। गुप्ता ने कहा कि मैंने उन्हें दस्तावेज दिखाया लेकिन किसी ने मेरी नहीं सुनी।’ इससे पहले, भाजपा की दिल्ली इकाई के प्रमुख आदेश गुप्ता ने मंगलवार को एनडीएमसी के महापौर को जहांगीरपुरी में दंगाइयों के अवैध निर्माण की पहचान करने और बुलडोजर का उपयोग करके उन्हें ध्वस्त करने के लिए एक पत्र लिखा था। साजिद सैफी की इलेक्ट्रिकल रिपेयरिंग की दुकान को भी ध्वस्त कर दिया गया। उन्होंने कहा, ‘‘शोभा यात्रा का बदला लिया जा रहा है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, न्यायालय द्वारा अभियान रोकने और यथास्थिति बनाए रखने के शुरुआती आदेश के बाद भी अतिक्रमण विरोधी अभियान डेढ़ घंटे तक चलता रहा। एनडीएमसी के एक अधिकारी ने पहचान गुप्त रखे जाने की शर्त पर कहा कि शीर्ष अदालत से लिखित आदेश नहीं मिलने के कारण यह अभियान जारी रहा। अधिकारी ने कहा कि आदेश मिलते ही इसे रोक दिया गया। वरिष्ठ वकील दुष्यंत दवे ने प्रधान न्यायाधीश एन वी रमण की अध्यक्षता वाली शीर्ष अदालत की पीठ का दोबारा रुख किया क्योंकि पहले का आदेश के बावजूद नगर निगम का अभियान जारी था। दवे ने कहा कि मुझे इसका फिर से उल्लेख करते हुए खेद है... सुबह मैंने इस मामले का जिक्र किया था। (रोक) आदेश की सूचना देने के बावजूद वे (अधिकारी) तोडफ़ोड़ को नहीं रोक रहे हैं। उनका कहना है कि उन्हें आधिकारिक रूप से कोई जानकारी नहीं मिली है। मैं महासचिव से पुलिस आयुक्त और उत्तरी दिल्ली नगर निगम के महापौर और आयुक्त को आदेश के बारे में बताने का अनुरोध करता हूं। अन्यथा देर हो जाएगी।’’ इस पर प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘ठीक है। सर्वोच्च अदालत के महासचिव के माध्यम से तत्काल इसकी सूचना दें। इससे पहले, पीठ ने अभियान पर रोक लगाने का आदेश दिया और शनिवार के सांप्रदायिक दंगों में आरोपियों के खिलाफ कथित रूप से लक्षित नगर निगम की कार्रवाई को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के लिए सहमत हो गई। हालांकि, उत्तरी दिल्ली नगर निगम के महापौर राजा इकबाल सिंह ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद अभियान को रोक दिया गया। राजा इकबाल सिंह ने पीटीआई-भाषा से कहा, ‘‘'हम उच्चतम न्यायालय के आदेश का पालन करेंगे। हमने अभियान रोक दिया है। हमनें तिरपाल के कुछ ढांचों को हटाया और कूड़ा वगैरह उठाया है।’’ उन्होंने दावा किया कि यह अतिक्रमणकारियों के खिलाफ नियमित कार्रवाई है और इसका 16 अप्रैल की हिंसा से कोई जुड़ाव नहीं है। यह कार्रवाई मध्य प्रदेश के खरगोन और गुजरात के आणंद जिलों में भाजपा सरकारों द्वारा किए गए तोडफ़ोड़ अभियान की पृष्ठभूमि में हुई है, जहां कथित दंगाइयों से जुड़ी संपत्तियों को गिराने के लिए बुलडोजर का इस्तेमाल किया गया था। मलिका बीबी ने कहा कि वह 25 साल से दुकान चला रही थीं और अधिकारियों ने किसी पूर्व सूचना के बिना इसे तोड़ दिया गया था। उन्होंने पीटीआई-भाषा से कहा, ‘‘उन्होंने मेरी दुकान को तोड़ दिया... यह पांच सदस्यों के हमारे परिवार के लिए आय का एकमात्र स्रोत था। मेरे दो बच्चे हैं और दोनों प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ रहे हैं। मुझे अब चिंता इस बात की है कि उनकी पढ़ाई कैसे जारी रहेगी और उनके अच्छे भविष्य की मेरी सभी उम्मीद खत्म हो गई हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने संविधान की प्रस्तावना वाला पृष्ठ और एक बुलडोजर की तस्वीर साझा करते हुए ट्वीट किया, ‘‘यह भारत के संवैधानिक मूल्यों को ध्वस्त किया गया है। गरीबों और अल्पसंख्यकों को सरकार प्रायोजित निशाना बनाया गया है।