शिवसागर : असम में एक बार फिर से परेश बरुवा नेतृत्वाधीन सशस्त्र विद्रोही संगठन अल्फा (स्वाधीन) की गतिविधियां बढ़ती जा रही है। पिछले लगभग छह महीने में मुख्यधारा से विमुख होकर असम के विभिन्न जिलों के कुल 256 युवक-युवतियों ने सशस्त्र विद्रोही संगठन में शामिल होने के लिए अपने घर परिवार को छोडक़र जंगल का रास्ता अख्तियार किया है, जो कि आम जनता के बीच चर्चा ही नहीं, बल्कि बड़ी चिंता का विषय है। पिछले 96 घंटों में ऊपरी असम के शिवसागर, डिब्रूगढ़, सदिया जिले के तीन युवकों के सशस्त्र विद्रोही संगठन की विचारधारा से आकर्षित होकर अल्फा (स्वाधीन) में शामिल होने के समाचार को लेकर भारी व्यापक प्रतिक्रिया देखी जा रही है। असम पुलिस के उच्चपदस्थ सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार पिछले साल 2021 के सितंबर महीने से अब तक कुल 256 युवक घर त्यागकर अल्फा (स्वाधीन) में शामिल होने के लिए म्यामां सीमा पर पहुंचे हैं। अल्फा (स्वाधीन) मुख्य सेनाध्यक्ष परेश असम उर्फ परेश बरुवा के करीबी माने जाने वाले तथा संगठन के प्रचार विभाग के शीर्ष नेता आईसेंग असम के नेतृत्व में अल्फा (स्वाधीन) में नए सदस्यों की भर्ती का अभियान चल रहा है। इस बीच इन नए भर्ती किए गए सदस्यों ने म्यामां के घने जंगलों में स्थित अल्फा (स्वाधीन) के शिविर में पहुंच कर अपने पहले चरण का सैन्य प्रशिक्षण लेना शुरू कर दिया है। अल्फा (स्वाधीन) में नए भर्ती हुए इन कुल 256 युवकों में से अधिकांश ऊपरी असम से हैं। हाल ही में ऊपरी असम के सदिया जिले के पूर्व कांग्रेसी नेता जनार्दन गोगोई की ओर से अल्फा (स्वाधीन) की सदस्यता ग्रहण करने के बाद अब शिवसागर जिले के नाजिरा सब डिवीजन अंतर्गत गेलेकी थाना क्षेत्र के लखीमपुर बस्ती निवासी लघु चाय उत्पादक नरेन मेस के बेटे पंकज मेस और डिब्रूगढ़ जिले के नाहरकटिया थाना क्षेत्र के नाखाम बांहधारी अंचल निवासी पवित्र गोगोई के बेटे पंकज गोगोई नामक दो युवकों के अल्फा (स्वाधीन) में शामिल होने के लिए जंगल का रास्ता पकड़ लिया है। नाहरकटिया के नाखाम बांहधारी निवासी पंकज गोगोई ने पिछले छह अप्रैल को अंतिम बार अपनी पत्नी से मोबाइल पर बातचीत की थी। इधर पिछले पंद्रह दिन से घर से लापता शिवसागर जिले के गेलेकी लखीमपुर बस्ती निवासी पंकज मेस ने अब तक अल्फा (स्वाधीन) में शामिल होने को लेकर अपने परिवार को कोई जानकारी नहीं दी। गत कुछ सालों से पंकज मेस चायपत्ती के व्यवसाय से जुड़ा हुआ था। अपने व्यवसाय के लिए पंकज मेस घर से दस बारह दिनों के लिए बाहर जाता ही रहता था। इस बार भी पिता नरेन मेस और माता इला मेस ने यही समझा था कि उनका बेटा व्यवसाय के काम से बाहर गया है। परंतु समाचार माध्यमों में पंकज मेस के अल्फा (स्वाधीन) में शामिल होने संबंधित समाचारों से उसके माता पिता सहित निकट परिजन तक हतप्रभ हैं। स्थानीय लोगों ने उच्च शिक्षित होने के बाद भी उपयुक्त सरकारी नौकरी नहीं मिलने के कारण ही बाध्य होकर पंकज मेस के अल्फा (स्वाधीन) में शामिल होने की आशंका जताई है। इधर सोशल मीडिया पर अल्फा (स्वाधीन) के समर्थन में पोस्ट डालने वाले उमेश कलिता नामक एक युवक को शिवसागर पुलिस ने गौरीसागर थाना क्षेत्र के रूपोहिमुख से हिरासत में लेकर लगातार पांच घंटे तक पूछताछ की। उल्लेखनीय है कि कांग्रेस नेता जनार्दन गोगोई के अल्फा (स्वाधीन) में शामिल होने के बाद ही वे जिस एनजीओ से जडि़त थे उससे जुड़े शिवसागर जिले के बेतबारी सेंगेलीबारी निवासी स्वपनील बोरपात्रगोहाईं नामक उद्यमी युवक को सदिया पुलिस ने गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया। इससे पहले भी कई बार पुलिस ने स्वपनील बोरपात्रगोहांई को अल्फा (स्वाधीन) के काम करने के आरोप में गिरफ्तार किया था। परंतु पुख्ता सबूत के अभाव में अदालत ने उसे रिहा कर दिया था। वहीं स्थानीय लोगों के अनुसार इलाके में हरित क्रांति के सूत्रधार युवा उद्यमी स्वपनील बोरपात्रगोहाईं का अल्फा संगठन से कोई नाता नहीं है। आखिर सशस्त्र विद्रोही संगठन अल्फा (स्वाधीन) के प्रति आकर्षण का कारण क्या है कि एक के बाद एक-एक कर शिक्षित युवक अपना घरबार छोडक़र जान हथेली पर लिए घने जंगलों का कठिन जीवन का रास्ता चुनने में भी संकोच नहीं कर रहे हैं। क्या शिक्षित युवाओं के विद्रोही संगठन के प्रति आकृृष्ट होने के पीछे बेरोजगारी ही मुख्य कारण है? इस संदर्भ में राज्य सरकार की तठस्थ भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। चूंकि हाल के वर्षों में केंद्र और राज्य सरकार की स्थिति के साथ ही वैश्विक महामारी कोविड-19 के चलते सशस्त्र विद्रोही संगठन अल्फा (स्वाधीन) की गतिविधियों में काफी कमी आई थी। राज्य में अमन चैन का माहौल बन गया था, जिससे कि सुरक्षित वातावरण में उद्योग, व्यापार वाणिज्य सहित विकास कार्यों ने भी गति पकड़ी थी। अल्फा (स्वाधीन) के मुख्य सेनाध्यक्ष परेश असम ने एकतरफा युद्धविराम तक की घोषणा की थी। परंतु इसके बावजूद क्या सरकार इस सुनहरे अवसर का समुचित लाभ उठाने में असफल रही? अल्फा संगठन के जन्मस्थान शिवसागर जिले में एक बार फिर से संगठन की सक्रियता से आम जनता में भय का माहौल है।
ऊपरी असम में बढ़ी अल्फा (आई) की सक्रियता, 256 युवक संगठन में शामिल