बीजिंग : यूक्रेन के खिलाफ रूस के युद्ध छेडऩे पर अमेरिका समेत कई पश्चिमी देशों ने उस पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगा रखे हैं। चीन शुरू से ही इस जंग में रूस के साथ खड़ा है और उसने यूक्रेन पर हमले का विरोध नहीं किया है, लेकिन एक हकीकत ये भी है कि चीन इस युद्ध के बीच भी फायदा कमाने में जुटा है। रूस-यूक्रेन युद्ध को भांपकर चीन पहले ही इससे फायदा लेने की कोशिशों में जुट गया था। युद्ध शुरू होने के बाद भी उसने न केवल रूस, बल्कि यूक्रेन को भी इसके लिए इस्तेमाल किया है और दोनों ही देशों को अपना ड्रोन दे रहा है। एक तरफ चीन यूक्रेन के खिलाफ लड़ाई में रूस का दोस्त होने का दावा करता है, तो वहीं दूसरी ओर अपने फायदे के लिए वह यूक्रेन को रूस से लड़ाई के लिए ड्रोन की सप्लाई भी कर रहा है। रूस से दोस्ती के साथ ही चीन की यूक्रेन से भी डिफेंस  डील है। साथ ही यूक्रेन ने चीनी कंपनी पर इसी ड्रोन को रूस को भी बेचने का आरोप लगाया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीनी कंपनी डीजेआई के बनाए हुए ड्रोन का इस्तेमाल यूक्रेन ने रूस के खिलाफ लड़ाई में किया है। यूक्रेन के उप-प्रधानमंत्री मायखाइलो फेडेरोव के अनुसार, यूक्रेन ने चीनी कंपनी डीजेआई से 2372 क्वाडकॉप्टर और 11 मिलिट्री अनमैंड एरियल व्हीकल ड्रोन करीब 513 अरब रुपए में खरीदे हैं। चीन की डीजेआई ने उसके ड्रोन के यूक्रेन युद्ध में इस्तेमाल से इनकार करते हुए कहा कि उसके ड्रोन सेना के इस्तेमाल के लिए नहीं बनाए जाते हैं और वह केवल सिविलियंस ड्रोन बनाता है। चीन ने 24 फरवरी को यूक्रेन युद्ध शुरू होने से पहले ही इसे भांप लिया था। इसलिए फरवरी की शुरुआत में ही रूस के साथ गेहूं के आयात पर लगे प्रतिबंधों को हटाते हुए रूस से ज्यादा गेहूं खरीदने की डील की थी और गैस खरीद को लेकर बड़ा करार किया था। इस साल फरवरी की शुरुआत में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन की चीन यात्रा के दौरान ही चीन ने गेहूं, गैस और कोयले से जुड़े करार किए थे। ऐसे समय में जब वैश्विक अनाज की कीमत पिछले 10 साल के उच्चतम स्तर पर हैं, तो दुनिया के सबसे बड़े गेहूं उत्पादक देश रूस से बड़ी मात्रा में गेहूं की खरीद से चीन को अपने यहां अनाज सप्लाई सुरक्षित बनाने में मदद मिलेगी। पहले चीन ने रूस से आने वाले गेहूं में ड्वॉर्फ बंट फंगस की मौजूदगी की चिंताओं की वजह से रूस से गेहूं आयात पर प्रतिबंध लगा दिया था। चीन ने 2021 में रूस से महज 12,227 मीट्रिक टन गेहूं का ही आयात किया था, ये रूस के इस दौरान दुनिया भर में किए गए 2.6 करोड़ मीट्रिक टन गेहूं के निर्यात का बहुत छोटा सा हिस्सा है। साथ ही चीन ने युद्ध से पहले ही रूस के साथ एनर्जी कोऑपरेशन डील के तहत 10 अरब क्यूबिक मीटर गैस खरीदने का भी करार कर लिया था। पुतिन की यात्रा के दौरान चीन ने रूस से नई पाइपलाइन के जरिए गैस खरीदने के लिए 117 अरब डॉलर, यानी करीब 8.89 लाख करोड़ रुपए का नया करार किया था। रूस-यूक्रेन युद्ध संकट के दौरान चीन की सबसे बड़ी चाल रूसी मुद्रा रूबल की कीमत अपनी करेंसी युआन की तुलना में तेजी से कम करने की रही है। चीन ने इसके लिए फॉरेन एक्सचेंज रेट कंट्रोल में ढील दी, जिससे रूस के रूबल की कीमत चीन के युआन की तुलना में तेजी से गिरी। चीन के इस कदम से उसका रूस से होने वाला आयात सस्ता हो गया। यूक्रेन पर हमले के बाद पश्चिमी देशों द्वारा इंटरनेशनल पेमेंट सिस्टम स्विफ्ट से कई रूसी बैंकों को बाहर करने के बाद उसकी करेंसी रूबल की कीमत में 40 प्रतिशत तक गिरावट आ गई थी। पिछले साल अक्टूबर में 1 युआन की कीमत 10.89 रूसी रूबल थी। 24 फरवरी को रूस के यूक्रेन पर हमले के समय 1 चीनी युआन की कीमत 13.43 रूसी रूबल थी।