इस्लामाबाद/नई दिल्ली : जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटने के बाद रविवार को पहली बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक दिन के दौरे पर यहां पहुंचे। उन्होंने यहां पंचायती राज दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में शिरकत की। कई योजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन किया। प्रधानमंत्री के कार्यक्रम से पहले एक हफ्ते के अंदर तीन आतंकी हमले हुए। इसमें 11 आतंकी मारे गए तो एक जवान भी शहीद हो गया। ये पहली बार नहीं था, जब जम्मू कश्मीर में आतंकी हमले हुए। ऐसा भी नहीं है कि केवल जम्मू कश्मीर या हिंदुस्तान में ही आतंकी हमले होते हैं। दक्षिण एशिया के देशों में ये बड़ी समस्या है। खासतौर पर भारत में आंतकवाद को बढ़ावा देने वाले पाकिस्तान और अफगानिस्तान में ऐसी घटनाएं सबसे ज्यादा होती हैं। भारत, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, श्रीलंका, भूटान, नेपाल, मालदीप में वर्ष 2000 से लेकर 19 अप्रैल 2022 तक यानी 22 साल में कुल 1.40 लाख आतंकी हमले हुए हैं। इनमें 1.85 लाख दहशतगर्द एनकाउंटर में ढेर हो गए। 73 हजार 688 लोग भी इन हमलों में बेमौत मारे गए। भारत में आतंकी घटनाओं के बारे में जानने के लिए हमने साउथ एशिया टेररिज्म पोर्टल यानी एसएटीपी को खंगाला। भारत में छह मार्च 2000 से लेकर 19 अप्रैल 2022 तक कुल 23 हजार 57 आतंकी हमले हुए। इनमें 14 हजार 98 आम नागरिक मारे गए, जबकि 7,392 सुरक्षाबल के जवान शहीद हुए। हालांकि, इस दौरान हमारे जवानों ने 23 हजार 472 आतंकवादियों को ढेर कर दिया।  जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने के बाद से आतंकी घटनाओं में कमी आई है। 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 हटा। इसके पहले की 841 दिनों में 843 आतंकी घटनाएं हुई थीं। यानी, अनुच्छेद 370 हटने के पहले औसतन रोज एक आतंकी घटना होती थी। 370 हटने के बाद के 841 दिन में घाटी में केवल 496 आतंकी घटनाएं हुईं। इस लिहाज से घाटी में होने वाली आतंकी घटनाओं में करीब 42 फीसदी की कमी आई है। 22 साल में सबसे ज्यादा अफगानिस्तान में आतंकी हमले हुए। यहां वर्ष 2000 से लेकर 19 अप्रैल 2022 तक 64.27 हजार घटनाएं हुईं हैं। इनमें 94 हजार 439 आतंकी मारे गए। आतंकवादियों को सबसे ज्यादा संरक्षण देने वाला पाकिस्तान खुद भी आतंकी घटनाओं से बच नहीं पाया है। यहां पिछले 22 साल के अंदर 29 हजार 813 आतंकी घटनाएं हुईं हैं। इनमें 20 हजार 921 आम नागरिक और 7641 जवान मारे गए। एसएटीपी के मुताबिक, इस दौरान 33 हजार 562 आतंकवादी भी मारे गए हैं। पाकिस्तान में 9,930 आतंकियों ने सरेंडर किया, जबकि 60 हजार 840 को यहां की पुलिस और सेना ने गिरफ्तार किया। पाकिस्तान में 598 सुसाइड अटैक भी हुए हैं। मतलब आतंकवादी ने खुद को भीड़-भाड़ वाले इलाके में ब्लास्ट कर दिया। इसमें 14538 जवान और आम नागरिक मारे गए।आतंकवादियों ने श्रीलंका में भी खूब खूनी खेल खेला। यहां वर्ष 2000 से लेकर अब तक 14 हजार 480 आतंकी हमले हुए। इसमें 12 हजार 519 आम नागरिकों की मौत हुई, जबकि सुरक्षाबल के 5,516 जवान भी मारे गए। इस दौरान 22 हजार 259 आतंकवादी भी मारे गए। साउथ एशिया टेररिज्म पोर्टल के मुताबिक, 22 साल में श्रीलंका में 10 हजार 261 आतंकियों ने सरेंडर किया, जबकि 2,581 दहशतगर्दों को यहां की पुलिस और सेना ने गिरफ्तार किया। 70 सुसाइड अटैक भी हुए, जिसमें 1035 लोग मारे गए। पड़ोसी देश नेपाल भी आतंकवादी हमलों से बच नहीं पाया है। यहां वर्ष 2000 से लेकर अब तक 7,135 आतंकी हमले दर्ज हुए हैं। इनमें 1,179 आम नागरिकों की मौत हुई, जबकि 2388 जवान भी शहीद हुए। इस दौरान 10 हजार 299 आतंकी भी ढेर हो गए। 5.41 लाख की आबादी वाले मालदीव में 34 आतंकी हमले हुए। इन हमलों में 17 लोग मारे गए। मालदीव की सेना और पुलिस ने 56 आतंकियों को गिरफ्तार भी किया। यहां कोई भी सुसाइड अटैक नहीं हुआ। भारत का सबसे शांत पड़ोसी देश भूटान ही है। यहां 22 सालों में केवल नौ आतंकी हमले हुए हैं।