गुवाहाटी : यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (अल्फा-स्वतंत्र) ने 26 अप्रैल को असम पुलिस के एक अंडरकवर एजेंट का पता लगाया है। विद्रोही समूह ने म्यामां में अपने शिविर में गुप्त एजेंट को हिरासत में लिया है। असम पुलिस एजेंट की पहचान संजीव शर्मा के रूप में हुई है और वह बाइहाटा चारिआली के मुक्तापुर का रहने वाला है। अल्फा-स्वतंत्र ने एक प्रेस बयान जारी किया है जिसमें कहा गया है कि संजीव शर्मा, जो हाल ही में प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन में शामिल हुआ है, असम पुलिस का जासूस है। बयान में आगे कहा गया कि भारतीय सेना और असम पुलिस ने उसे एक अंडरकवर एजेंट के रूप में विद्रोही समूह में घुसपैठ करने और महत्वपूर्ण खुफिया जानकारी इकट्ठा करने के लिए भेजा था। रिपोर्टों के अनुसार संजीव के इस साहसी कार्य को करने के पीछे का कारण सरासर प्रतिशोध था। संजीव ने एक वीडियो संदेश में बताया कि कामरूप के एसपी पार्थ सारथी महंत और सेना के अधिकारी धुनुमोनी सैकिया ने उन्हें प्रशिक्षण दिया और उसके बाद उन्हें अल्फा भेज दिया। उन्होंने खुलासा किया कि उन्हें शिविर के ठिकाने जैसी महत्वपूर्ण जानकारी इकट्ठा करने का निर्देश दिया गया था। उन्होंने यह भी खुलासा किया कि उन्हें जानकारी इकट्ठा करने के लिए एसपी और सेना के अधिकारियों की ओर से एक करोड़ रुपए की मोटी राशि का इनाम दिया जाएगा। इसके अलावा उन्होंने कहा कि उन्होंने अल्फा-स्वतंत्र में शामिल होने से पहले सेना के साथ-साथ पुलिस के लिए कई मिशनों में काम किया, जिसके लिए उन्हें दो मिशनों में क्रमश: 10,000 रुपए और 20,000 रुपए का भुगतान किया गया था। उसने आगे कहा कि उसे यह भी कहा गया था कि अगर वह पकड़ा जाता है तो वह इस तथ्य से इनकार करे कि वह एक अंडरकवर एजेंट है। उसे एक गुप्त पासवर्ड दिया गया था और कहा गया था कि अगर उसका भंडाफोड़ हो जाता है तो वह पासवर्ड बोलें। उसने खुलासा किया कि पासवर्ड के रूप में 7896 नबंर दिया गया था।
अल्फा के शिविर में पकड़ा गया पुलिस का खुफिया एजेंट