शिलांग : 2024 तक पूर्वोत्तर की सभी राज्यों की राजधानियों को रेलवे से जोडऩे की केंद्र की योजना से शिलांग को वंचित  होने की संभावना है। परिवहन मंत्री शखियतभा लामारे ने रेलवे को राज्य की राजधानी में लाने से संबंधित मुद्दों पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि मुझे कुछ भी कहने से पहले हमें समस्याओं पर चर्चा करनी होगी। उधर पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (एनएफआर)के एक अधिकारी ने कहा कि   शिलांग को छोडक़र पूर्वोत्तर  के सभी राज्यों की राजधानियों को रेलवे ग्रिड पर लगाने का काम जोरों पर चल रहा है। उन्होंने कहा कि कोहिमा, आइजोल, इंफाल और गंगटोक को रेलवे से जोडऩे की परियोजनाएं अच्छी तरह से आगे बढ़ रही हैं और हमें उम्मीद है कि ये राजधानियां अगले साल या 2024 तक रेलवे के नक्शे पर आ जाएंगी। एनएफआर अधिकारी ने स्वीकार किया कि वे परियोजना के विरोध के कारण मेघालय में कोई पैठ बनाने में असमर्थ रहे हैं। उन्होंने कहा कि शिलांग को भूल जाइए, हम रेलवे लाइन को असम की सीमा से थोड़ा आगे बरनीहाट तक भी नहीं ले जा पाए हैं। मेघालय में दबाव समूह रेलवे परियोजना का विरोध कर रहे हैं क्योंकि उनका मानना है कि यात्री ट्रेनें बड़े पैमाने पर बाहरी लोगों को राज्य में लाएंगी। खासी छात्र संघ (केएसयू) के अध्यक्ष, लैम्बोकस्टार मारंगर ने कहा कि रेलवे के खिलाफ हमारा रुख अपरिवर्तित है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा इनर-लाइन परमिट सिस्टम लागू करने के बाद यूनियन रेलवे पर चर्चा करेगी। नेशनल पीपुल्स पार्टी के नेतृत्व वाली एमडीए सरकार ने कथित तौर पर पिछले चार वर्षों से ठंडे बस्ते में पड़ी रेलवे परियोजना को पुनर्जीवित करने में बहुत कम दिलचस्पी दिखाई है। केएसयू के सदस्यों ने 2017 में टेटेलिया-बिरनीहाट रेलवे लाइन के निर्माण को रोक दिया था।  20.5 किलोमीटर लंबी रेलवे परियोजना का असम हिस्सा लगभग पूरा हो चुका है। असम में  तेतेलिया और रि-भोई जिले में बरनीहाट को जोडऩे वाली परियोजना का अनुमान 496 करोड़ रुपए है। मेघालय में ट्रैक की कुल लंबाई 2.5 किमी है।